मंडियों में दलहनों की कीमतों में गिरावट के बावजूद रिटेल में दाल के भाव अभी भी ऊंचे
31-Dec-2024 10:04 AM
मंडियों में दलहनों की कीमतों में गिरावट के बावजूद रिटेल में दाल के भाव अभी भी ऊंचे
★ सरकार द्वारा किये गये विभिन्न प्रयासों के कारण मंडियों में दलहनों की कीमतें निम्न स्तर पर आ चुकी हैं परन्तु रिटेल में भाव अभी भी ऊंचे।
★ गत सप्ताह सरकार ने रिटेलर्स को दलहन के दाम घटाने की बात भी कही।
★ बढ़े भावों के कारण उपभोक्ताओं को अभी भी ऊंचे भाव पर दाल खरीदनी पड़ रही है।
★ उपभोक्ता मत्रालय के अनुसार चना दाल के आल इंडिया रिटेल भाव 93.57, तुवर दाल के 156.6, उड़द दाल के 123.81, मूंग दल 114 व मसूर दाल के 89.49 रुपए प्रति किलो थी जबकि मंडियों में भाव इससे बहुत कम हैं। पिछले 2-3 महीने से रिटेल में भाव बहुत कम घटे।
★ दलहनों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पीली मटर आयात खोला, मूंग को छोड़ अन्य दलहनों की आयात समय सीमा को 31 मार्च 2025 भी किया जिसके परिणामस्वरुप विदेशों से बड़ी मात्रा में दलहनों का आयात किया गया।
★ पीली मटर का आयात 23-24 लाख टन हो चुका है जिससे अन्य दलहनों की खपत पर भी असर पड़ा।
★ इस वर्ष तुवर का अच्छा उत्पादन होने की उम्मीद तथा विदेशों से भी आयात अच्छी मात्रा में हुआ जिसके परिणामस्वरुप आवक के दौरान तुवर में गिरावट देखी गयी। पिछले दो साल से कीमतें MSP से अधिक थी जो अब MSP के आसपास चल रही हैं।
★ उड़द का उत्पादन घटने के बावजूद विदेशों से हो रहा है अच्छा आयात।
★ म्यांमार में इस वर्ष उड़द उत्पादन 6.5 लाख टन पहुंचने की उम्मीद यानी भविष्य में म्यांमार से बढ़ेगा उड़द आयात।
★ मूंग बाजार में भी देखी गयी स्थिरता, देखना होगा आगामी ग्रीष्मकालीन सीजन में मूंग की कैसी बिजाई होती है।
★ आई ग्रेन इंडिया का मानना है कि इस वर्ष भी मूंग बिजाई बढ़ सकती है।
★ चना में पिछले सप्ताह से अब तक एक तरफ़ा गिरावट देखी गयी।
★ ऑस्ट्रेलिया से बड़ी मात्रा में हो रहे हैं सौदे।
★ साथ ही मटर का आयात खोले जाने से डिमांड पर पड़ा असर।
★ गत सीजन में आवक के दौरान मसूर की कीमतें कम थी। तथा उसके बाद कनाडा व ऑस्ट्रेलिया से आयात जारी होने के कारण सीजन भर कीमतों पर पड़ा असर जिसके परिणामस्वरुप चालू सीजन में मसूर बिजाई घट रही है।
★ कुल मिलाकर विदेशों से बड़ी मात्रा में हो रहे आयात से दलहनों की कीमतों पर पड़ा असर,म उपलब्धता सुगम होने से कीमतों में विशेष तेजी के आसार बेहद कम।
