लस्टर गेहूं की बढ़ती आवक से बाजार में दबाव, बेहतर क्वालिटी में लिवाली बढ़ी।
10-Apr-2026 07:09 PM
हाल ही में हुई बारिश व ओलावृष्टि के कारण उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रमुख गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। खड़ी फसल पर ओलों और लगातार बारिश के चलते दानों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिससे उत्पादन के साथ-साथ क्वालिटी पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। मौसम के इस प्रभाव का असर अब मंडियों में साफ नजर आ रहा है।
उत्पादक मंडियों में इन दिनों लस्टर/लच्छ (कम चमक व नमी युक्त) गेहूं की आवक बढ़ रही है। ऐसे गेहूं की गुणवत्ता कमजोर होने के कारण खरीदार अब सतर्क हो गए हैं और केवल अच्छी क्वालिटी के गेहूं पर ही ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। वर्तमान में गेहूं का व्यापार पूरी तरह क्वालिटी आधारित हो गया है। बाजार में बेस्ट क्वालिटी गेहूं की मांग मजबूत बनी हुई है।
स्टॉकिस्टों और फ्लोर मिलर्स द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं की लिवाली लगातार जारी है, जिससे अच्छे माल के भाव में मजबूती बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर, लस्टर और नमी युक्त गेहूं की बढ़ती उपलब्धता के कारण ऐसे माल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। खरीदार इस तरह के गेहूं में सीमित रुचि दिखा रहे हैं, जिससे इसकी बिकवाली धीमी बनी हुई है।
फ्लोर मिलर्स की बढ़ती लिवाली के चलते दिल्ली में बेस्ट क्वालिटी गेहूं के भाव में आज 10 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़त दर्ज की गई, जिससे कीमतें 2530/2560 रुपए प्रति क्विंटल हो गई हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश की मंडियों में भी 10/15 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी देखने को मिली है, जहां शाहजहांपुर और हरदोई में भाव 2100/2300 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं।
राजस्थान के बूंदी बाजार में भी लिवाली बेहतर रहने से गेहूं की कीमतों में 50 रुपए प्रति क्विंटल की उल्लेखनीय तेजी आई है, जिसके बाद भाव 2300/2450 रुपए प्रति क्विंटल हो गए हैं।
आई ग्रेन इंडिया का मानना है कि आने वाले दिनों में गेहूं बाजार की दिशा मुख्य रूप से गुणवत्ता पर निर्भर रहेगी। बेहतर क्वालिटी का माल सीमित रहने पर उसमें तेजी बनी रह सकती है, जबकि कमजोर क्वालिटी के गेहूं में दबाव जारी रहने की संभावना है।
