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22-Sep-2026 05:34 PM
मुम्बई। ऊंचे आयात खर्च, रुपए की कमजोर विनिमय दर एवं वैश्विक बाजार के दबाव के कारण भारतीय कंपनियों द्वारा पीक त्यौहारी सीजन (दशहरा-दीपावली) से पूर्व खाद्य तेल की कीमतों में 7-8 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी किए जाने की संभावना है।
लेकिन घरेलू तिलहनों की जोरदार आवक होने से खाद्य तेलों की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ेगी और उम्मीद के अनुरूप यदि सरकार तेलों पर आयात शुल्क में कटौती करती है तो कीमतों में सीमित वृद्धि ही हो पाएगी।
भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे प्रमुख आयातक देश है। इसके आयात पर देश की निर्भरता बढ़कर 58 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है। वैश्विक बाजार की तेजी-मंदी तथा रुपया की विनिमय दर में आने वाले चढ़ाव-उतार का भारतीय खाद्य तेल बाजार पर सीधा असर पड़ता है।
यदि खाद्य तेलों का दाम बढ़ाया जाता है तो मार्च के बाद से यह तीसरा इजाफा होगा। मार्च से जून के बीच दो बार 5-6 प्रतिशत की वृद्धि की गई और इस तरह खाद्य तेलों के दाम में कुल मिलाकर 10-12 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गई। क्रूड खाद्य तेलों का आयात महंगा बैठ रहा है क्योंकि वैश्विक बाजार में भाव ऊंचा हो गया है।
शिपमेंट खर्च में बढ़ोत्तरी हो गई है और डॉलर के सापेक्ष रुपए का मूल्य काफी घट गया है। इससे भारतीय प्रोससेर्स एवं रिफाइनर्स के मार्जिन में काफी कमी आ गई है और इसलिए उसे खाद्य तेलों का दाम बढ़ाने के लिए विवश होना पड़ सकता है। 12 सितम्बर को मुम्बई बंदरगाह पर आयात खर्च क्रूड पाम तेल का 1265 डॉलर क्रूड सोया तेल का 1314 डॉलर तथा क्रूड सूरजमुखी तेल का 1380 डॉलर प्रति दर्ज किया गया।