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14-Oct-2026 02:18 PM
मुम्बई। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष रबी सीजन के दौरान सबसे प्रमुख खाद्यान्न- गेहूं के उत्पादन क्षेत्र में 5-10 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना है। हालांकि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान जैसे प्रांतों में खेतों की मिटटी में नमी का अंश मौजूद होने से किसानों को गेहूं की बोआई करने में ज्यादा कठिनाई नहीं होनी चाहिए मगर बिहार, महाराष्ट्र एवं गुजरात जैसे राज्यों के कई भागों में बिजाई के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं।
देश के कुछ हिस्सों में पानी की कमी के कारण किसानों को गेहूं के बजाए अन्य फसलों की खेती को प्राथमिकता देने के लिए विवश होना पड़ सकता है। उद्योग समीक्षकों के अनुसार किसान ऐसी फसलों की बिजाई पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं जिसे सिंचाई के लिए पानी की कम आवश्यकता पड़ती है।
वैसे सरकार के पास गेहूं का विशाल स्टॉक मौजूद है जिससे अगले उत्पादन में थोड़ी-बहुत कमी आने के बावजूद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए कोई गंभीर खतरा उत्पन्न नहीं होगा।
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र जैसे राज्यों के कुछ भागों में किसान गेहूं के बिजाई क्षेत्र में कटौती करने पर विचार कर सकते हैं। रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया के अनुसार विभिन्न कारणों से मौजूदा रबी सीजन के दौरान गेहूं का रकबा कुछ घटने की संभावना है। इस बार गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 1 प्रतिशत से भी कम का इजाफा हुआ है जिससे किसान नाखुश हैं।