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खरीफ कालीन तिलहनों के सकल उत्पादन में बढ़ोत्तरी में संदेह

22-Oct-2026 04:00 PM

खरीफ कालीन तिलहनों के सकल उत्पादन में बढ़ोत्तरी में संदेह

मुम्बई। यद्यपि राष्ट्रीय स्तर पर खरीफ कालीन तिलहन फसलों का कुल बिजाई क्षेत्र 2025 को 195.55 लाख हेक्टेयर से 1.11 लाख हेक्टेयर बढ़कर 2026 में 196.66 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया लेकिन अल नीनो और कमजोर मानसून के कारण फसल को हुए नुकसान को देखते हुए तिलहन फसलों के सकल उत्पादन में इजाफा होने में संदेह है।

खरीफ फसलों के संवर्ग में इस बार मुख्यतः तिल एवं सूरजमुखी का क्षेत्रफल  बढ़ा है और मूंगफली का रकबा लगभग बराबर रहा। दूसरी ओर सोयाबीन एवं अरंडी के बिजाई क्षेत्र में कुछ कमी आ गई। दिलचस्प तथ्य यह है कि एक अग्रणी उद्योग संगठन- सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने सोयाबीन के उत्पादन क्षेत्र में 5 लाख हेक्टेयर की वृद्धि होने का अनुमान लगाया है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि 2026 के खरीफ सीजन में 2 अक्टूबर तक सोयाबीन का कुल उत्पादन क्षेत्र 123.16 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो पिछले साल से कुछ कम था। मूंगफली का बिजाई क्षेत्र करीब 51 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया जो गत वर्ष के लगभग बराबर ही है। दूसरी ओर तिल का उत्पादन क्षेत्र उछलकर 11.23 लाख हेक्टेयर तथा सूरजमुखी का बिजाई क्षेत्र बढ़कर 1.29 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जबकि अरंडी का क्षेत्रफल घटकर 8.97 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। तिलहन फसलों की कटाई-तैयारी शुरू हो चुकी है। 

गुजरात में खरीफ कालीन तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 31.95 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 30.28 लाख हेक्टेयर रह गया। इसके तहत खासकर मूंगफली का बिजाई क्षेत्र गिरकर 20.70 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया। वह मूंगफली का शीर्ष उत्पादक राज्य है। 

इस बीच सोपा ने सोयाबीन का घरेलू उत्पादन 2025-26 सीजन के 110.29 लाख टन से 2.11 प्रतिशत गिरकर 2026-27 के सीजन में 107.90 लाख टन रह जाने का अनुमान लगाया है।