कृषि मंत्रालय द्वारा खाद्य तेलों की खपत पर पहला राष्ट्रीय सर्वेक्षण आरंभ
22-Jan-2025 04:12 PM
नई दिल्ली । केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने पहली बार देश में खाद्य तेल की खपत के तौर-तरीकों का आंकलन करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सर्वेक्षण का अभियान आरंभ किया है जिसका उद्देश्य खाद्य तेल-तिलहन पर मिशन के नए प्रारूप को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करना है।
वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह सर्वेक्षण कार्यक्रम 45 दिनों (डेढ़ माह) तक चलेगा जो प्रश्नावली पर आधारित है।
9 जनवरी से यह आरंभ हो चुका है और 23 फरवरी तक जारी रहेगा। भारत संसार में खाद्य तेलों का सबसे प्रमुख आयातक और खपतकर्ता देश है लेकिन यहां इसकी खपत के पैटर्न का नवीनतम आंकड़ा उपलब्ध नहीं रहता है और केवल इसका अनुमान ही लगाया जाता है।
इस सर्वेक्षण के बाद खाद्य तेलों की खपत के बारे में सटीक जानकारी सामने आ सकती है। सर्वेक्षण के दौरान खाद्य तेल की पसंद के बारे में भी सूचना एकत्रित की जाएगी जिससे नीतिगत निर्णय लेने में सरकार को सहायता मिलेगी।
उद्योग क्षेत्र की रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में खाद्य तेल की प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक खपत बढ़कर 20 किलो से भी ऊपर पहुंच गई है जबकि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने 12 किलो तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) ने 13 किलो वार्षिक खपत की सीमा निर्धारित कर रखी है।
ध्यान देने की बात है कि वर्ष 1950-60 के दौरान खाद्य तेलों की प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक खपत महज 2.9 किलो थी। बढ़ती जनसंख्या, लोगों की आमदनी में बढ़ोत्तरी, शहरीकरण एवं खाद्य शैली में आए बदलाव जैसे कारणों से हाल के दशकों में खाद्य तेलों की मांग एवं खपत में जबदस्त बढ़ोत्तरी हुई है।
इस व्यापक सर्वेक्षण के तहत आम लोगों के खाद्य तेल की प्राथमिकता पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है और उनसे कई तरह के आसान सवाल पूछे जा रहे हैं।
इस सर्वेक्षण से यह पता लगाने में आसानी होगी कि देश के किस भाग में कौन-कौन से खाद्य तेल को ज्यादा पसंद किया जाता है और उसकी असली वजह क्या है।
