कश्मीर में केसर की इनडोर खेती का प्रयोग शुरू
16-Jan-2025 12:20 PM
पम्पोर । मौसम एवं जलवायु की बदलती स्थिति के कारण उत्पादन पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव से परेशान कश्मीर के केसर उत्पादक अब प्रायोगिक तौर पर इस सर्वाधिक मूल्यवान मसाले की इनडोर खेती का प्रचलन शुरू कर रहे हैं। ज्ञात हो कि कश्मीर का पम्पोर क्षेत्र केसर उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
भारत में केसर का सर्वाधिक उत्पादन इसी क्षेत्र में होता है। ईरान के बाद भारत को केसर का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक देश माना जाता है। इसका भाव फिलहाल 3.25 लाख रुपए (3800 डॉलर) प्रति किलो (2.20 पौंड) चल रहा है।
इसकी खेती कुछ जटिल होती है और उसमें भारी संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है। इतना ही नहीं बल्कि केसर की फसल मौसम के प्रति भी अत्यन्त संवेदनशील होती है इसलिए इस पर विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
अक्टूबर से केसर के पौधे खिलने लगते हैं और फिर सुगंधित लाल केसर की तुड़ाई हाथों से होने लगती है। केसर का उपयोग अनेक उद्देश्यों में किया जाता है।
अधिकांश उत्पादक परम्परागत तरीके से केसर की खेती पसंद करते हैं क्योंकि इसका रंग, सुगंध एवं स्वाद बेहतर होता है जबकि इनडोर खेती में क्वालिटी कुछ कमजोर रहने की आशंका होती है।
कुछ कृषि विशेषज्ञ नए प्रयोग के तहत केसर की इनडोर खेती कर रहे हैं या करने का सुझाव दे रहे हैं क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ता जा रहा है।
भारत में 90 प्रतिशत केसर का उत्पादन कश्मीर में होता है और पम्पोर सबसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। प्रतिकूल मौसम के कारण वहां केसर का उत्पादन 2010-11 सीजन के 8 टन से घटकर 2023-24 में 2.60 टन पर अटक गया।
