कपास की उपज दर बढ़ाने हेतु बजट में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान करने का आग्रह

26-Dec-2024 01:48 PM

मुम्बई । कपास क्षेत्र के अग्रणी व्यापारिक संगठन- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया है कि राष्ट्रीय स्तर पर कपास की औसत उपज दर बढ़ाने तथा किसानों को अपने खेतों में ड्रिप सिंचाई विधि अपनाने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए केन्द्रीय आम बजट में कम से कम 500 करोड़ रुपए की सहायता राशि का प्रावधान किया जाए। इसके साथ-साथ एसोसिएशन ने कपास की नई-नई किस्मों का बीज भी उपलब्ध करवाने की जरूरत पर जोर दिया है। 

एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार भारत में लगभग 67 प्रतिशत कपास का उत्पादन वर्षा पर आश्रित क्षेत्र में होता है। चूंकि इन इलाकों में कपास की फसल पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहती है इसलिए कई बार फसल को प्रगति के महत्वपूर्ण चरण में और खासकर कुल फूल लगने एवं रूई के गोले के निर्माण के समय सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता है।

इसके फलस्वरूप उसकी उपज दर एवं क्वालिटी प्रभावित हो जाती है। कपास की फसल को पूरे सीजन में जितने पानी की जरूरत पड़ती है उसके 80 प्रतिशत से अधिक भाव की आवश्यकता फूल लगने एवं गोला बनने के दौरान होती है।

यदि उस चरण में ड्रिप इरीगेशन सिस्टम से पौधों की अच्छी सिंचाई हो जाए तो फसल की हालत काफी बेहतर हो सकती है। 

सिंचित क्षेत्रों की तुलना में वर्षा पर आश्रित इलाकों में कपास की उपज दर काफी नीचे रहती है। महाराष्ट्र में यह समस्या ज्यादा गंभीर है क्योंकि वहां 95 प्रतिशत कपास का रकबा वर्षा पर आश्रित क्षेत्र में अवस्थित है जहां अक्सर बहुत कम बारिश होती है और पानी की उपलब्धता भी सीमित रहती है।

मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक एवं गुजरात जैसे राज्यों में भी यह समस्या मौजूद है। भारत में कपास की खेती तो विशाल क्षेत्रफल में होती है मगर उपज दर काफी नीचे होने से अपेक्षित उत्पादन प्राप्त नहीं हो पाता है।