कैम्पको सुपारी उत्पादकों को लाभप्रद मूल्य देने के लिए प्रतिबद्ध
01-Dec-2025 09:10 PM
मंगलोर। एक महत्वपूर्ण सहकारी संस्था- सेन्ट्रल अरेकानट एंड कोकोआ मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग को ऑपरेटिव (कैम्पको) लिमिटेड के अध्यक्ष का कहना है कि बाजार में तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद संस्था ने पिछले पांच साल के दौरान सुपारी उत्पादकों को लाभप्रद एवं बेहतर वापसी सुनिश्चित किया है जिससे बाजार मूल्य में काफी हद तक स्थिरता का माहौल बरकरार रहा
कैम्पको के अध्यक्ष के अनुसार सफेद सुपारी के नए स्टॉक का जो भाव 2020 में 240 से 320 रुपए प्रति किलो के बीच चल रहा था वह अब बढ़कर 360-485 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। इसी तरह सफेद सुपारी के पुराने स्टॉक का दमा भी इसी अवधि में 320-380 रुपए प्रति किलो से उछलकर 360-525 रुपए प्रति किलो हो गया है।
लाल सुपारी की कीमतों में भी अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है। इसका दाम वर्ष 2020 में 350-398 रुपए प्रति किलो था जो 2025 में उछलकर 545-585 रुपए प्रति किलो हो गया।
अध्यक्ष महोदय का कहना है कि विदेशों से भारी मात्रा में गैर कानूनी तरीके सुपारी का (सस्ता) आयात होने से घरेलू बाजार भाव में काफी उतार-चढ़ाव बना रहा।
इसके अलावा जीएसटी की वजह से भी व्यापारी घरेलू उत्पादकों से कम दाम पर सुपारी खरीदने की कोशिश करते रहे। इससे स्वदेशी किसानों को अपनी सुपारी का लाभप्रद मूल्य प्राप्त करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ रहा था।
लेकिन इस विषम परिस्थिति में कैम्पको आगे आया और उसने किसानों से ऊंचे मूल्य पर सुपारी की खरीद करके उसे राहत प्रदान की।
बेहतर कारोबारी व्यवस्था के कारण कैम्पको का कुल टर्न ओवर वित्त वर्ष 2020-21 के 2134.15 करोड़ रुपए से करीब 70 प्रतिशत उछलकर 2024-25 में 3631 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। कैम्पको एक विश्ववसनीय एवं मददगार संस्था के रूप में उभरा है।
