कमजोर घरेलू उत्पादन के कारण तुवर के आयात में जबदस्त वृद्धि

22-Jan-2025 05:16 PM

नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने एक बार फिर अरहर (तुवर) के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को 31 मार्च 2025 से एक साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक नियत कर दिया है।

इस बार यह निर्णय समयावधि समाप्त होने से काफी पहले किया गया है जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार हर हाल में सप्लाई की चेन को बरकरार रखना चाहती है ताकि कीमतों पर अंकुश लगाने में सहायता मिल सके। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2023-24 के सीजन में 34.17 लाख टन तुवर का घरेलू उत्पादन हुआ जो मांग एवं खपत की तुलना में बहुत कम था। इसके फलस्वरूप कीमतों में जोरदार बढ़ोत्तरी का दौर शुरू हो गया।

इसके चलते विदेशों से आयात भी तेजी से बढ़ने लगा। अप्रैल से दिसम्बर 2024 के नौ महीनों में तुवर का आयात उछलकर 10.90 लाख टन के करीब पहुंच गया

जो वर्ष 2023 के इन्हीं महीनों के आयात 6.27 लाख टन, 2022 के आयात 6.34 लाख टन तथा वर्ष 2021 की समान अवधि के आयात 5.92 लाख टन से काफी अधिक और वस्तुतः एक रिकॉर्ड स्तर है। 

सम्पूर्ण वित्त वर्ष की बात की जाए तो तुवर का आयात 2023-24 में 7.70 लाख टन, 2022-23 में 8.96 लाख टन तथा 2021-22 में 8.40 लाख टन दर्ज किया गया था जबकि 2024-25 के शुरूआती नौ महीनों में ही यह 10.90 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है और जनवरी-मार्च 2025 के आयात का आंकड़ा अभी सामने आना बाकी है।

जिस रफ्तार से विदेशों से माल आ रहा है उससे प्रतीत होता है कि चालू वित्त वर्ष की सम्पूर्ण अवधि (अप्रैल- 2024-मार्च-  2025) के दौरान अरहर का कुल आयात उछलकर 12-13 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच सकता है। 

श्रीलंका में आयोजित साउथ एशिया एग्री फोरम की एक मीटिंग में 2024-25 सीजन के दौरान भारत में 38 लाख टन तथा म्यांमार में 3.75 लाख टन तुवर के उत्पादन का अनुमान लगाते हुए अफ्रीकी देशों में भी बेहतर उत्पादन की संभावना व्यक्त की गई।

म्यांमार में तुवर के नए माल की आवक शुरू होने पर फरवरी के अंत से तुवर का निर्यात आरंभ होने की उम्मीद है। घरेलू फसल भी आने लगी है। इससे तुवर की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने तथा कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना रहेगी।