काफी देर से आने के बावजूद शीतकालीन वर्षा से रबी फसलों को फायदा होने की उम्मीद
28-Dec-2024 01:14 PM
नई दिल्ली । हालांकि शीतकालीन बारिश के आने में इस बार काफी देर हो गई लेकिन फिर भी यह खेतों में खड़ी रबी कालीन फसलों के लिए काफी लाभदायक साबित होने वाली है।
मौसम विभाग के मुताबिक वर्षा की मात्रा अच्छी है और इसका दायरा भी बढ़ा है जिससे पश्चिमोत्तर राज्यों के साथ-साथ मध्यवर्ती भारत में भी फसलों को राहत मिलने के आसार हैं। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा संभाग में वर्षा एवं ओलावृष्टि की संभावना व्यक्त की गई है।
दिल्ली-एनसीआर तथा आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से ठंडे मौसम के बीच वर्षा का दौर जारी है। इसकी प्रतीक्षा नवम्बर से ही की जा रही थी जब तापमान सामान्य औसत से ऊंचा चल रहा था और रबी फसलों की बिजाई तथा प्रगति में बाधा पड़ रही थी।
दिसम्बर के अंतिम दिनों में हो रही यह वर्षा खासकर गेहूं तथा सरसों की फसल के लिए वरदान मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल के मुकाबले वर्तमान रबी सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है मगर सरसों का रकबा पीछे चल रहा है।
अक्टूबर-नवम्बर के दौरान देश के मध्यवर्ती एवं पश्चिमोत्तर भाग में बारिश का अभाव रहा जबकि इस अवधि में रबी फसलों की बिजाई बड़े पैमाने पर होती है।
उम्मीद की जा रही है कि इस वर्षा से रबी फसलों के विकास की गति तेज होगी और उपज दर में बढ़ोत्तरी हो सकती है।
मौसम विभाग के मुताबिक 27-28 दिसम्बर तक वर्षा का दौर जारी रहेगा और 29 दिसम्बर के मध्याह्न से मौसम साफ होने लगेगा। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक वर्षा के बाद अब फसलों को मध्यम स्तर के धूप की आवश्यकता पड़ेगी जबकि घना कोहरा इसे नुकसान पहुंचा सकता है।
हालांकि पश्चिमी मध्य प्रदेश, चंडीगढ़ एवं हरियाणा के हिसार में ओलावृष्टि हुई है लेकिन इसका दायरा सीमित होने से रबी फसलों को ज्यादा नुकसान पहुंचने की खबर नहीं है।
इस बारिश से किसानों को कम से कम एक सिंचाई की बचत हो जाएगी और इससे गेहूं उत्पादकों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
अगर आगे भी मौसम अनुकूल रहा तो रबी सीजन के इस सबसे प्रमुख खाद्यान्न के उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी की उम्मीद की जा सकती है।
