जायद फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से 77 हजार हेक्टेयर आगे

14-Apr-2026 12:46 PM

नई दिल्ली। ग्रीष्मकालीन (जायद) फसलों की बिजाई धीरे-धीरे अंतिम चरण की ओर बढ़ती जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर इसका रकबा गत वर्ष से कुछ आगे चल रहा है जिसमें दलहन-तिलहन एवं मोटे अनाज का अच्छा योगदान है। धान का क्षेत्रफल कुछ पीछे है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार चालू वर्ष के दौरान 10 अप्रैल तक जायद फसलों का सकल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 64.10 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 63.33 लाख हेक्टेयर से 77 हजार हेक्टेयर ज्यादा है। इस वर्ष जायद फसलों का सामान्य औसत क्षेत्रफल 75.37 लाख हेक्टेयर आंका गया है। वर्ष 2025 में ग्रीष्मकालीन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 83.92 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था। 

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान ग्रीष्मकालीन धान का उत्पादन क्षेत्र 32.30 लाख हेक्टेयर से घटकर 30.59 लाख हेक्टेयर रह गया लेकिन दलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र 10.71 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 11.54 लाख हेक्टेयर, मोटे अनाजों का रकबा 12.70 लाख हेक्टेयर से उछलकर 13.67 लाख हेक्टेयर तथा तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 7.62 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 8.31 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। 

दलहन फसलों में मूंग का बिजाई क्षेत्र 8.15 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 8.47 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा। इसी तरह तिलहन फसलों में तिल का उत्पादन क्षेत्र 3.00 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.09 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा और मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 4.20 लाख हेक्टेयर से उछलकर 4.77 लाख हेक्टेयर तथा सूरजमुखी का क्षेत्रफल 35 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 39 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया। मोटे अनाजों में बाजरा तथा मक्का के रकबे में अच्छी बढ़ोतरी हुई।