जूट का समर्थन मूल्य 5650 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित

22-Jan-2025 07:51 PM

नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने 2025-26 के मार्केटिंग सीजन के लिए जूट (पटसन) का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 5650 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जो 2024-25 के मार्केटिंग सीजन के लिए नियत 5335 रुपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य से 315 रुपए अधिक है।

केन्द्रीय कैबिनेट द्वारा इस मूल्य को स्वीकृति प्रदान की गई है और इससे किसानों को अखिल भारतीय स्तर पर जूट के औसत भारित उत्पादन खर्च से 66.8 प्रतिशत ऊंचा दाम प्राप्त होने की संभावना है। वर्ष 2014-15 से लेकर अब तक जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 2.35 गुणा का इजाफा हो चुका है। 

जूट से बारदाना या गन्नी बोरियों का निर्माण होता है  जिसका उपयोग अनाज तथा दलहन-तिलहन एवं चीनी आदि की पैकिंग में किया जाता है।

इसके अलावा जूट से कई अन्य तरह की वस्तुएं भी बनाई जाती है और घरेलू उपयोग के साथ-साथ उसका निर्यात भी किया जाता है।

जूट के प्रमुख उत्पादक राज्यों में पश्चिमी बंगाल, बिहार, आंध्र प्रदेश, आसाम तथा मेघालय आदि शामिल हैं। कपास की भांति जूट भी औद्यगिक फसल की श्रेणी में सम्मिलित है। 

केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री के अनुसार देश में जूट का उत्पादन घटता जा रहा है। इसका उत्पादन अंततः किसानों के निर्णय पर निर्भर करता है। कई अन्य कारक भी इसकी खेती के लिए जिम्मेदार होते हैं।

सरकार किसानों को जूट का उत्पादन बढ़ाने के लिए निरंतर प्रेरित-प्रोत्साहित कर रही है और इसलिए नियमित रूप से इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि 2023-24 सीजन की तुलना में 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 285 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया था जबकि 2025-26 के मार्केटिंग सीजन हेतु उससे भी ज्यादा यानी 315 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।