हरियाणा में 4% मंडी शुल्क से बढ़ी लागत, गेहूं उद्योग पर गहराया संकट
23-Feb-2026 02:19 PM
हरियाणा में 4% मंडी शुल्क से बढ़ी लागत, गेहूं उद्योग पर गहराया संकट
★ MSP आधारित लागत से नीचे भाव, ₹212 की डिस्पैरिटी ने बढ़ाई चिंता
★ रबी सीजन 2026 में हरियाणा का गेहूं उद्योग बढ़ती लागत और गिरते बाजार भाव के दोहरे दबाव में फंस गया है। हरियाणा से दिल्ली के लॉरेंस रोड बाजार तक गेहूं पहुंचाने की कुल लागत ₹2,922 प्रति क्विंटल बैठ रही है, जबकि दिल्ली में मौजूदा बाजार भाव ₹2,710 प्रति क्विंटल है। इस प्रकार ₹212 प्रति क्विंटल की नकारात्मक डिस्पैरिटी सामने आई है।
★ चूंकि हरियाणा और पंजाब में 95 प्रतिशत से अधिक गेहूं की खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाती है, इसलिए MSP ₹2,585 को ही लागत का आधार माना जाता है। MSP के साथ 4% मंडी शुल्क (₹103), कमीशन, मजदूरी, जूट बैग और दिल्ली परिवहन जोड़ने पर कुल लागत ₹2,922 तक पहुंच जाती है। मौजूदा बाजार भाव पर व्यापार करने पर सीधा घाटा बन रहा है।
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4% मंडी शुल्क बना बड़ा कारण
★ हरियाणा देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में शामिल है, लेकिन यहां 4% मंडी शुल्क लगाया जाता है, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। पंजाब में शून्य मंडी शुल्क, उत्तर प्रदेश में 1.5%, उत्तराखंड: 2.5% और राजस्थान में लगभग 2.1% हैं।
★ अधिक मंडी शुल्क के कारण राज्य में मिलिंग उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हुई है। कई मिलर्स बंद हो चुके हैं या बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
★ हाल की FCI ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) में गेहूं की लिफ्टिंग काफी अच्छी रही, जिससे साफ है कि हरियाणा और पंजाब का बाजार सरकारी योजनाओं पर अत्यधिक निर्भर हो चुका है। हालांकि OMSS की मात्रा, शर्तों और स्टॉक लिमिट लगाने-हटाने में अचानक बदलाव से बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इससे व्यापारियों और मिलर्स की खरीद रणनीति प्रभावित हो रही है और कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
★ सरकार द्वारा गेहूं निर्यात की अनुमति दिए जाने के बावजूद घरेलू बाजार में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। मौजूदा कीमतों पर निर्यात में भी डिस्पैरिटी उभर रही है, जिससे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
★ उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि हरियाणा सरकार गेहूं उद्योग को बचाना चाहती है, तो 4% मंडी शुल्क की समीक्षा करनी होगी। शुल्क में कटौती से लागत घटेगी, बाजार प्रतिस्पर्धी बनेगा और मिलिंग उद्योग को राहत मिल सकती है।
★ फिलहाल बढ़ती लागत, गिरते भाव और नीति अस्थिरता ने हरियाणा के गेहूं उद्योग को गंभीर चुनौती के दौर में ला खड़ा किया है।
