ग्रीष्मकालीन फसलों का क्षेत्रफल गत वर्ष से कुछ पीछे

10-Mar-2026 11:50 AM

नई दिल्ली। वर्षा की कमी एवं बढ़ती गर्मी के बावजूद देश में ग्रीष्मकालीन (जायद) फसलों की खेती जारी है लेकिन इसका क्षेत्रफल गत वर्ष से कुछ पीछे चल रहा है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चालू वर्ष के दौरान 6 मार्च 2026 तक राष्ट्रीय स्तर पर जायद फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 31.70 लाख हेक्टेयर पर पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 33.40 लाख हेक्टयर से 1.70 लाख हेक्टेयर कम है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में मौजूदा जायद सीजन के दौरान धान का उत्पादन क्षेत्र 26.90 लाख हेक्टेयर से घटकर 25.30 लाख हेक्टेयर रह गया और मोटे अनाजों का बिजाई क्षेत्र भी 2.73 लाख हेक्टेयर कम है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में मौजूदा जायद सीजन के दौरान धान का उत्पादन क्षेत्र 26.90 लाख हेक्टेयर से घटकर 25.30 लाख हेक्टेयर रह गया और मोटे अनाजों का बिजाई क्षेत्र भी 2.73 लाख हेक्टेयर से गिरकर 2.51 लाख हेक्टेयर रह गया लेकिन दलहनों का रकबा 1.57 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 1.59 लाख हेक्टेयर तथा तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 2.18 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.29 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

दलहन फसलों में मूंग का उत्पादन क्षेत्र 98 हजार हेक्टेयर से घटकर 95 हजार हेक्टेयर तथा उड़द का रकबा 46 हजार हेक्टेयर से गिरकर 45 हजार हेक्टेयर रह गया। 

मोटे अनाजों में ज्वार का बिजाई क्षेत्र 24 हजार हेक्टेयर से गिरकर 15 हजार हेक्टेयर, बाजरा का क्षेत्रफल 53 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 46 हजार हेक्टेयर तथा मक्का का उत्पादन क्षेत्र 1.88 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.72 लाख हेक्टेयर रह गया मगर रागी का रकबा 7 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 17 हजार हेक्टेयर हो गया। 

तिलहनों के संवर्ग में मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 1.50 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.58 लाख हेक्टेयर तथा सूरजमुखी का बिजाई क्षेत्र 15 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 19 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा जबकि तिल का क्षेत्रफल 50 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष के बराबर ही है।