गैर बासमती चावल के निर्यात में गिरावट

27-Nov-2025 08:40 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ निकाय- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) अब संकलित आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में यानी अप्रैल-सितम्बर 2025 के दौरान भारत से गैर बासमती चावल का निर्यात घटकर 70.20 लाख टन पर अटक गया

जो वित्त वर्ष 2023-24 की समान अवधि के शिपमेंट 89.60 लाख टन से काफी कम रहा। वित्त वर्ष 2024-25 की समान अवधि में गैर बासमती संवर्ग के कच्चे चावल के व्यापारिक निर्यात पर प्रतिबंध लगा हुआ था इसलिए उससे तुलना नहीं हो सकती है। 

निर्यातकों का कहना है कि कुछ खास कारणों से चावल के निर्यात शिपमेंट की गति धीमी चल रही है। अफ्रीकी खरीदारों के पास अमरीकी डॉलर का अभाव हो गया था। यद्यपि वे खरीदार अपनी-अपनी स्थानीय मुद्रा में भारतीय चावल के लिए किसी भी मूल्य का भुगतान करने के लिए तैयार है

अगर भारतीय निर्यातक उसे स्वीकार करने के लिए राजी नहीं हैं। चावल की कमजोर निर्यात मांग का एक कारण यह है कि भारत सरकार ने अक्टूबर 2024 से चावल के निर्यात शिपमेंट पर लगी पाबन्दी को व्यवस्थित ढंग से नहीं हटाया।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने गैर बासमती सफेद चावल को व्यापारिक निर्यात पर जुलाई 2023 में प्रतिबंध लगा दिया था जो सितम्बर 2024 तक बरकरार रहा।

अक्टूबर 2024 से प्रतिबंध को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन पहले इस पर सीमा शुल्क लगाया गया और फिर इसके लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य निर्धारित किया गया।

जब भारत से सफेद गैर बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा हुआ था तब एशिया एवं अफ्रीका महाद्वीप के अनेक खरीदारों ने वियतनाम जैसे आपूर्तिकर्ता देशों के साथ चावल के आयात का करार किया।

कुछ भारतीय निर्यातकों ने पहले अपना करार वियतनाम के साथ किया और फिर वहां से चावल लेकर अन्य देशों को भेजने का प्रयास किया।

जुलाई 2023 से सितम्बर 2024 तक वैश्विक बाजार में भारतीय सफेद गैर बासमती चावल का शिपमेंट बंद रहा और जब अक्टूबर में निर्यात खोला गया तब भारत को अपनी पोजीशन मजबूत करने में काफी समय लग गया। अफ्रीकी देश सेनेगल में चावल का निर्यात प्रभावित हो रहा है।