गेहूं के प्रति बढ़ती चिंता

18-Jan-2025 01:49 PM

मूल्य नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद थोक मंडियों में गेहूं  का भाव काफी ऊंचे स्तर पर बरकरार है और इसमें ज्यादा नरमी आने का कोई संकेत नहीं मिल रहा है।

खाद्य मंत्रालय ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत सप्ताहिक नीलामी के लिए गेहूं की मात्रा एक लाख टन से बढ़ाकर डेढ़  लाख टन निर्धारित कर दी है ताकि मिलर्स / प्रोसेसर्स को अधिक मात्रा में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का स्टॉक प्राप्त हो सके लेकिन इसका भी कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ रहा है।

दरअसल भारत अत्यन्त विशाल आबादी वाला देश है और यहां गेहूं की खपत बड़े पैमाने पर होती है। इसके अनुरूप आपूर्ति नहीं होने पर कीमतों में स्वाभाविक रूप से इजाफा हो जाता है।

सरकार के पास गेहूं का सीमित स्टॉक है और इसलिए वह बाजार में प्रभावशाली ढंग से हस्तक्षेप करने में सफल नहीं हो रही है।

वैसे की आमतौर पर नवम्बर से मार्च तक की अवधि को गेहूं की आपूर्ति का ऑफ, या लीन सीजन माना जाता है जिसमें अक्सर बाजार भाव ऊंचा और तेज हो जाता है।

सरकार के हस्तक्षेप से कभी कीमतों में थोड़ी-नरमी आती है लेकिन मांग बढ़ने के बाद कीमत पुनः तेज हो जाती है। गेहूं एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों के व्यापारिक निर्यात पर वर्ष 2022 से ही प्रतिबंध लगा हुआ है और सरकार ने गेहूं पर भंडारण सीमा भी लागू कर रखा है लेकिन फिर भी मंडियों में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता में बढ़ोतरी नहीं हो रही है।

इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि किसानों एवं व्यापारियों के पास गेहूं का अत्यन्त सीमित स्टॉक बचा हुआ है। ध्यान देने की बात है कि ओएमएसएस के तहत व्यापारियों को सरकारी गेहूं की बिक्री नहीं की जाती है। 

वर्तमान रबी सीजन में गेहूं का बिजाई क्षेत्र बढ़कर 320 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है और कुल मिलाकर मौसम की हालत भी फसल के लिए काफी हद तक अनुकूल बनी हुई है।

इसे देखते हुए उत्पादन में कुछ सुधार आने की उम्मीद की जा रही है। कृषि मंत्रालय ने गेहूं के उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाकर 1150 लाख टन निर्धारित किया है लेकिन खाद्य मंत्रालय ने इसकी खरीद का लक्ष्य 300 लाख टन ही नियत किया है और इसे हासिल करने के लिए उसे एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ सकता है।

पंजाब-हरियाणा को छोड़कर अन्य राज्यों में गेहूं की सरकारी खरीद का प्रदर्शन पिछले तीन वर्षों से कमजोर चल रहा है जिसमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार एवं गुजरात जैसे प्रान्त भी शामिल हैं। इन राज्यों को गेहूं की खरीद बढ़ाने के लिए कहा जा रहा है।