डि-ऑयल्ड राइस ब्रान के निर्यात पर लगी रोक को हटाने का आग्रह
21-May-2024 02:04 PM
मुम्बई । स्वदेशी तिलहन- तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र की एक अग्रणी संस्था- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) का कहना है
कि भारत से वियतनाम एवं थाईलैंड सहित कई अन्य एशियाई देशों को सालाना करीब 5-6 लाख टन डि ऑयल्ड राइस ब्रान (एक्सट्रैक्शन) का निर्यात होता रहा है मगर सरकार द्वारा इस पर प्रतिबंध लगाए जाने से उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जब भारत की छवि एवं साख एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में पूरी तरह स्थापित हो गई तभी सरकार ने इसके निर्यात पर रोक लगाने की घोषणा कर दी। इससे वैश्विक बाजार को झटका लग सकता है।
'सी' के अध्यक्ष का कहना है कि 28 जुलाई 2023 को राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया और इसकी अवधि 31 मार्च 2024 तक नियत की गई। बाद में प्रतिबंध की समय सीमा को 31 जुलाई 2024 तक बढ़ा दिया गया।
'सी' ने सरकार से इस पाबंदी के यथाशीघ्र हटाने का आग्रह करते हुए कहा है कि यदि यह संभव न हो तो प्रतिबंध की अवधि को 31 जुलाई 2024 से आगे न बढ़ाया जाए।
निर्यात पर प्रतिबंध लागू होने से घरेलू बाजार में राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन का भाव काफी कमजोर पड़ गया है क्योंकि इसकी खपत कम होती है। इससे खासकर पश्चिम बंगाल के राइस मिलर्स को भारी क्षति हो रही है।
पहले बंगाल से विशाल मात्रा में डि ऑयल्ड राइस ब्रान का निर्यात हो रहा था मगर अब केवल दक्षिण भारत में इसका थोड़ा-बहुत-कारोबार हो रहा है।
समझा जाता है कि जून-जुलाई में मानसून की वर्षा एवं धान की रोपाई का आंकलन करने के बाद सरकार इस प्रतिबंध को हटाने या इसकी समय सीमा आगे बढ़ने का निर्णय ले सकती है।
खरीफ कालीन धान की खेती अगले महीने से शुरू होने वाली है और बंगाल धान-चावल का प्रमुख उत्पादक राज्य है। कोलकाता बंदरगाह से राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन का दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भारी मात्रा में इसका निर्यात शिपमेंट हो रहा था।
