चीनी मिलों द्वारा नियत समय से पूर्व गन्ना की क्रशिंग शुरू करने की संभावना क्षीण
18-Aug-2026 03:42 PM
नई दिल्ली। अखिल भारतीय स्तर पर गन्ना का उत्पादन क्षेत्र गिरकर 58.31 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया है जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र 58.62 लाख हेक्टेयर से 31 हजार हेक्टेयर कम है। पहले यह क्षेत्रफल 86 हजार हेक्टेयर आगे चल रहा था। कुछ राज्यों में गन्ना का रकबा बढ़ा है जबकि कुछ अन्य प्रांतों में क्षेत्रफल पीछे हो गया है।
चीनी उद्योग के दो शीर्ष संगठनों ने पहले सरकार को आश्वासन दिया था कि 2026-27 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में गन्ना की क्रशिंग जल्दी से जल्दी शुरू करने का प्रयास किया जाएगा ताकि चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति को त्यौहारी सीजन में सुगम बनाए रखने में सहायता मिल सके। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि उद्योग को अपने इस वादे को पूरा करने में कुछ व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे अग्रणी उत्पादक राज्यों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से गन्ना की फसल को परिपक्व होने में समय लगेगा और अगर अपरिपक्व गन्ना की क्रशिंग की गई तो चीनी की रिकवरी दर घट सकती है।
उत्तर प्रदेश गन्ना का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है। वहां भी मानसूनी बारिश की हालत अनिश्चित एवं अनियमित रही है और वर्षा का वितरण भी असमान रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अब भी बारिश की आवश्यकता महसूस की जा रही है। बिहार, पंजाब तथा हरियाणा में गन्ना की फसल पूरी तरह उत्साहवर्धक स्थिति में नहीं है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी वर्षा कम हुई है। गुजरात में स्थिति लगभग सामान्य है मगर तमिलनाडु में हालात अच्छे नहीं बताए जा रहे हैं।
