भारत से चना और मसूर पर शुल्क बढ़ने की चर्चा से ऑस्ट्रेलिया के उत्पादक चिंतित
01-Dec-2025 09:37 PM
ब्रिसबेन। हालांकि भारत सरकार द्वारा न तो कोई घोषणा की गई है और न ही कोई खास संकेत दिया गया है लेकिन वैश्विक बाजार में इस बात क जोरदार चर्चा हो रही है
कि भारत में देसी चना तथा मसूर पर आयात शुल्क बढ़ सकता है। फिलहाल इन दोनों दलहनों फाबा बीन्स फसल की कटाई-तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है लेकिन दक्षिणी क्षेत्र में ठंडा और नम मौसम के कारण मसूर फसल की कटाई की रफ्तार सुस्त पड़ गई है।
भारत में शुल्क वृद्धि की चर्चा से ऑस्ट्रेलिया के चना एवं मसूर निर्यातक चिंतित हैं और बाजार पर गहरी निगाह रखते हुए सीमित मात्रा में अपने स्टॉक की बिक्री कर रहे हैं ऑस्ट्रेलियाई बाजार पर नए माल की आपूर्ति का दबाव भी पड़ रहा है।
लेट बिजाई वाली फसल की क्वालिटी के प्रति भी किसानों की चिंता बढ़ गई है जबकि कमजोर बाजार भाव के बावजूद इसे अपनी फसल की कटाई एवं बिक्री को जारी रखने के लिए विवश होना पड़ रहा है। उत्पादकों में ज्यादा उत्साह नहीं देखा जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में देसी चना का भाव छह सप्ताह पूर्व की तुलना में बल्क निर्यात के लिए ब्रिसबेन डिलीवरी के वास्ते 40 डॉलर उछलकर 640 डॉलर प्रति टन के करीब पहुंच गया है।
पिछले कटाई सीजन की तुलना में इस बार ब्रिसबेन बंदरगाह से चना के बल्क निर्यात की गति धीमी चल रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि जिसके पास अपना जहाज या बड़ी नाव है केवल वही चना का शिपमेंट कर सकते हैं।
दरअसल बड़े-बड़े व्यापारिक जहाजों पर लोडिंग के लायक माल का अनुबंध नहीं हो रहा है पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के जिन व्यापारिर्यों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ था वे इस बार बाजार में ठहरने का साहस नहीं दिखा रहे हैं। कंटेनरों में चना का नगण्य निर्यात हो रहा है।
मुस्लिम बहुल देशों में रमजान के लिए चना की मांग निकलने की उम्मीद की जा रही है जिससे कीमतों में कुछ मजबूती आने की उम्मीद है लेकिन प्रतिकूल मौसम से दाने की क्वालिटी खराब होने से मसूर के दाम पर दबाव बढ़ सकता है।
