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21-Sep-2026 04:58 PM
मुम्बई। भारत में सस्टैनेबल एविएशन फ्यूल (स्थायी जहाजरानी) ईंधन या एसएएफ) का उत्पादन बढ़ाने की जोरदार तैयारी चल रही है जिसमें यूज कुकिंग ऑयल (इस्तेमाल हो चुके वनस्पति तेल) काफी अहम भूमिका निभा सकता है। लेकिन समस्या यह है कि संभावित तौर पर यूज्ड कुकिंग ऑयल (यूको) का संग्रहण काफी कम होता है। मोटे अनुमान के अनुसार भारत में प्रति वर्ष 18 से 26 लाख टन के बीच यूज्ड कुकिंग ऑयल (यूको) का सृजन होता है मगर इसमें से केवल 11.00-15.60 लाख टन तक ही औपचारिक संग्रहण (कलेक्शन) हो पाता है।
भारत ने अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए एसएएफ ब्लेंडिंग का सांकेतिक लक्ष्य वर्ष 2027 के लिए 1 प्रतिशत 2028 के लिए 2 प्रतिशत और वर्ष 2030 तक के लिए 5 प्रतिशत निर्धारित करने का प्लान बनाया है। इस 5 प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए करीब 4-5 लाख टन एसएएफ की वार्षिक जरूरत पड़ सकती है।
लेकिन एसएएफ की भविष्यत मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए यूको अकेला ही पर्याप्त नहीं होगा इसलिए भारत कृषि अवशेषों, लुग्दी (गन्ने की खोई), अवशिष्ट वसा, तेल-तिलहन, कूड़ा-कचरा एवं कुछ अन्य अवयवों से एसएएफ के उत्पादन पर भी विचार कर रहा है।
भारत में तकरीबन 290-300 लाख टन खाद्य तेलों की वार्षिक खपत होती है जिससे यहां यूज्ड कुकिंग ऑयल (यूको) की भारी उपलब्धता की गुंजाईश बनी रहती है। यदि संकलित रूप से यूको का स्टॉक एकत्रित किया जाए और सस्टैनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) में उसका मिश्रण किया जाए तो देश को विदेशी मुद्रा की बचत करने में काफी सहायता मिल सकती है। सरकार अब इस तरफ विशेष ध्यान दे रही है।