बांग्ला देश को भारतीय रूई के निर्यात पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं

12-Feb-2026 11:01 AM

मुम्बई। हालांकि अमरीका और बांग्ला देश के बीच जो द्विपक्षीय व्यापार समझौता हुआ है उसके तहत बांग्ला देश अमरीकी रूई का आयात बढ़ाने पर सहमत हो गया है लेकिन इससे बांग्ला देश में भारतीय रूई के निर्यात पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है और वह इसका सबसे प्रमुख खरीदार बना रह सकता है।

उद्योग-व्यापार समीक्षकों का कहना है कि भारत से रूई का निर्यात निरन्तर जारी रहेगा क्योंकि यह अपेक्षाकृत सस्ता पड़ेगा और बांग्ला देश के मिलर्स छोटी-छोटी खेपों में तथा कम समय में इसे मंगा सकते हैं। 

बांग्ला देश परम्परागत रूप से भारतीय रूई के शीर्ष खरीदारों में शामिल रहा है। द्विपक्षीय व्यापार समझौते के प्रावधानों का अनुपालन करते हुए बांग्ला देश का टेक्सटाइल उद्योग अमरीकी रूई के आयात का प्रयास कर सकता है लेकिन विशाल मात्रा में इसका आयात होना मुश्किल लगता है।

समझा जाता है कि यदि बांग्ला देश अमरीकी रूई से निर्मित वस्त्र उत्पादों का निर्यात करता है तो अमरीका में उसे शुल्क मुक्त शिपमेंट की अनुमति दी जा सकती है। बांग्ला देशी टेक्सटाइल उद्योग के लिए यह एक प्लस प्वाइंट साबित हो सकता है क्योंकि अमरीकी बाजार में उसे अन्य देशों से कुछ अग्रता मिल जाएगी। 

अमरीका में बांग्ला देश के उत्पादों पर 19 प्रतिशत का टैरिफ लगाया गया है जो भारत से ज्यादा मगर इंडोनेशिया एवं कम्बोडिया जैसे देशों से कुछ कम है। एक अग्रणी व्यापारिक संगठन का कहना है कि अमरीका से रूई की खेप को बांग्ला देश पहुंचने में कम से कम 45 दिनों का समय लगेगा जबकि भारतीय रूई की खेप वहां अधिक से अधिक 7-8 दिन में पहुंच सकती है।

बांग्ला देश के आयातकों की क्रियाशील वित्तीय स्थिति काफी जटिल है। वहां वस्त्र उत्पादों की घरेलू मांग अच्छी रहती है और उसके निर्यातक यूरोप सहित कई अन्य बाजारों में भी वस्त्र उत्पादों का निर्यात करते हैं इसलिए वहां भारतीय रूई के आयात की आवश्यकता बरकरार रह सकती है।