अल नीनो का लोकल प्रभाव ज्यादा गंभीर होने की आशंका
05-Jun-2026 01:37 PM
नई दिल्ली। इतना तो लगभग निश्चित हो गया है कि इस वर्ष भारत पर अल नीनो मौसम चक्र का खतरा बना रहेगा। वैसे इसकी सघनता, सक्रियता एवं शक्ति के सम्बन्ध में फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है। अल नीनो के असर से दक्षिण पश्चिम मानसून के कमजोर पड़ने की आशंका है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस वर्ष दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के सापेक्ष राष्ट्रीय स्तर पर 90 प्रतिशत बारिश होने की संभावना व्यक्त की है जो गत वर्ष की तुलना में भी काफी कम है।
लेकिन असली समस्या वर्षा के असमान वितरण की है क्योंकि क्षेत्रीय स्तर पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। जिन इलाकों में अच्छी या मूसलाधार बारिश होगी वहां तो खरीफ फसलों का उत्पादन बेहतर होगा लेकिन जिन क्षेत्रों में कम या नगण्य वर्षा होगी वहां सूखे का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। ध्यान देने की बात है कि जून से अगस्त तक देश के विभिन्न भागों में तापमान काफी ऊंचा रहता है।
मौसम विभाग ने अप्रैल के अपने अपडेट में वर्ष 2026 के दौरान एलपीए के मुकाबले 92 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान व्यक्त किया था जिसे मई की रिपोर्ट में घटाकर 90 प्रतिशत नियत कर दिया। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो 2026 का साल 2015 के बाद सबसे ज्यादा सूखा रह सकता है।
वर्ष 2015 में 93 प्रतिशत बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई थी। उधर विश्व मौसम संगठन ने कहा है कि जून से अगस्त के दौरान अल नीनो के सक्रिय होने के 80 प्रतिशत आसार हैं। यह भारत के लिए खतरे की घंटी हो सकती है।
