आम बजट से उम्मीद
31-Jan-2026 11:52 AM
घरेलू एवं वैश्विक स्तर पर बढ़ती चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने तथा देश की अर्थव्यवस्था के विकास की राह पर गतिशील बनाए रखने के लिए सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आम बजट में कुछ महत्वपूर्ण सामयिक एवं व्यावहारिक उपायों का प्रस्ताव रखना पड़ सकता है।
विभिन्न देशों / क्षेत्रों के साथ हो रहे मुक्त व्यापार समझौते से कुछ क्षेत्रों की प्रगति में बाधा पड़ने की आशंका है इसलिए वित्त मंत्री का ध्यान उस पर केन्द्रित होगा। भारत के सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) की विकास दर काफी ऊंची है जिसे बरकरार रखने की चुनौती रहेगी।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बदलाव हो रहे हैं और इसके संभावित दुष्परिणामों से भारतीय कारोबारियों (आयातकों / निर्यातकों) को बचाने के लिए आम बजट में कुछ नए उपायों को शामिल किया जा सकता है। डॉलर की तुलना में भारतीय रुपए की विनिमय दर लुढ़ककर रसातल में चली गई है
जिससे बेशक निर्यात बढ़ाने में कुछ सहायता मिल रही है मगर विदेशों से होने वाला आयात काफी महंगा हो गया है। इसका असर घरेलू बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है। पेट्रोलियम का आयात खर्च बढ़ने से तमाम क्षेत्रों पर असर पड़ेगा।
दरअसल विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से विशाल मात्रा में पूंजी निकाल कर उसे बाहर भेज रहे हैं जिस पर नियंत्रण लगाने की सख्त आवश्यकता है। विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ाना भी इतना ही आवश्यक है।
वित्त मंत्री को कृषि क्षेत्र के विकास के लिए न केवल आवश्यक उपायों की घोषणा करनी पड़ेगी बल्कि बजट आवंटन भी बढ़ाना पड़ेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय पहले ही इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त कर चुका है।
वित्त वर्ष 2024-25 में कृषि क्षेत्र की विकास दर 4.6 प्रतिशत रही थी जो 2025-26 में घटकर 3.1 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है। कृषि और सम्बद्ध क्षेत्र देश के करोड़ों लोगों की आजीविका का सबसे प्रमुख माध्यम बना हुआ है।
यह सही है कि मुफ्त व्यापार समझौतों के तहत फिलहाल अधिकांश कृषि उत्पादों को शामिल नहीं किया गया है और सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (एमएफएन) के तहत भी ज्यादा रियायत नहीं दी गई है
लेकिन आगे का रोडमैप सरकार को पहले ही तैयार करना पड़ेगा ताकि देश की प्रगति निरन्तर जारी रहे। इधर घरेलू प्रभाग में भी वित्त मंत्री द्वारा कुछ महत्वपूर्ण राहतों-रियायतों की घोषणा किए जाने की उम्मीद है।
