25 किलो से अधिक की पैकिंग वाले चावल पर लग सकता है जीएसटी

29-Jul-2024 11:18 AM

नई दिल्ली । 25 किलो से अधिक की पैकिंग (बोरी) में बेचे जाने वाले चावल पर जीएसटी लागू होने की संभावना है जिसका घरेलू बाजार भाव पर असर पड़ेगा। दरअसल इसके लिए जो सुझाव दिया गया है उसमें चावल को एक कृषि गत फार्म उत्पाद नहीं माना गया है।

जीएसटी कौंसिल की इस सिफारिश के आधार पर केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा जारी नवीनतम सर्कुलर से प्रतीत होता है कि 25 किलो से अधिक की पैकिंग वाले चावल की बिक्री यदि खुदरा (मूल्य) रूप में की जाएगी तो उस पर टैक्स लग सकता है क्योंकि उसे कृषि गत फार्म उत्पाद की श्रेणी से बाहर माना गया है।

केवल कृषि गत फार्म उत्पाद यानी खेतों में पैदा होने वाली जिंसों को ही फार्म उत्पाद के रूप में वर्गीकृत किया गया है जिस पर जीएसटी नहीं लगाने का प्रावधान है। दरअसल चावल को आटा तथा दालों के संवर्ग में रखने पर विचार हो रहा है जिस पर जीएसटी लागू है।

बोर्ड तथा जीएसटी कौंसिल का मानना है कि मूल कृषि गत फार्म जिंस धान है जबकि चावल उसका प्रोसेस्ड उत्पाद है। इसी तरह गेहूं मूल एवं आटा प्रोसेस्ड उत्पाद है जैसे दलहन मूल उत्पाद एवं दली दालें उसका प्रोसेस्ड उत्पाद है। 25 किलो से अधिक मात्रा में पैक वाले चावल की बिक्री अगर लूज रूप में होती है तो उस पर जीएसटी लागू हो सकता है।

इस सम्बन्ध में उद्योग-व्यापार क्षेत्र की ओर से आने वाली प्रति क्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है। समीक्षकों का कहना है कि सरकार के इस निर्णय से चावल का घरेलू बाजार भाव कुछ और बढ़ सकता है जबकि पहले ही वह काफी ऊंचे स्तर पर चल रहा है।

खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने का सरकार का प्रयास भी इससे प्रभावित होगा। महंगाई नियंत्रण के उद्देश्य से ही टुकड़ा चावल एवं गैर बासमती सफेद चावल का व्यापारिक निर्यात बंद किया गया है। सीबीआई द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया था

कि 18 जुलाई 2022 से दालों चावल- गेहूं जैसे अनाजों, आटा आदि पर जीएसटी प्रभावी होना था जब वह प्री-पैकेज्ड तथा लेबल युक्त हो, बशर्ते उसकी पैकिंग 25 किलो से अधिक की मात्रा में एक सिंगल पैकेज में हुई हो। लूज रूप में इसकी बिक्री पर जीएसटी लागू हो सकता है। पूरी स्थिति जल्दी ही स्पष्ट होने की उम्मीद है।