विदेशों से आयात जारी रहने से घरेलू प्रभाग में दलहनों की उपलब्धता बढ़ी

27-Jan-2025 05:46 PM

मुम्बई । हाल के महीनों में घरेलू प्रभाग में दाल-दलहन की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी हद तक सुगम हो गई है क्योंकि एक तरफ खरीफ कालीन फसलों की जोरदार आवक हो रही थी तो दूसरी ओर विदेशों से भारी मात्रा में इसका आयात भी जारी है।

भारत में सिर्फ मूंग को छोड़कर अन्य सभी प्रमुख दलहनों का शुल्क मुक्त आयात हो रहा है जिसमें तुवर, उड़द, मसूर, देसी चना एवं पीली मटर शामिल है।

आई ग्रेन इंडिया के अनुसार दिसम्बर 2023 से अब तक देश में लगभग 28 लाख टन पीली मटर का आयात हो चुका है और इसमें से 11 लाख टन का स्टॉक अभी विभिन्न बंदरगाहों पर मौजूद है।

पीली मटर का आयात मुख्यत: कनाडा एवं रूस से हो रहा है। इसके अलावा म्यांमार से उड़द एवं तुवर, कनाडा तथा ऑस्ट्रेलिया से मसूर और ऑस्ट्रेलिया से देसी चना मंगाया जा रहा है।

अफ्रीकी देशों से तुवर एवं चना मंगाया जाता है। कई अन्य देशों से भी थोड़ी-बहुत मात्रा में दलहनों का आयात हो रहा है। म्यांमार से अप्रैल-दिसम्बर 2024 में 15 लाख टन दलहनों का निर्यात हुआ जिसमें उड़द, तुवर एवं मूंग का शिपमेंट शामिल था।

उड़द एवं तुवर का अधिकांश भाग भारत को निर्यात किया गया जबकि मूंग का शिपमेंट चीन तथा यूरोप को हुआ क्योंकि भारत में इसके आयात पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

भारत सरकार ने तुवर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को 31 मार्च 2025 से आगे एक साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक निर्धारित कर दिया है।

म्यांमार में इस वर्ष करीब 3 लाख टन तुवर का उत्पादन होने का अनुमान है जिससे भारत में नियमित रूप से इसका आयात होता रहेगा।

पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अवधि भी 31 दिसम्बर 2024 से बढ़ाकर 28 फरवरी 2025 तक नियत की गई है जबकि आगे इसमें और बढ़ोत्तरी हो सकती है।

उड़द, मसूर एवं देसी चना के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 31 मार्च 2025 को समाप्त हो रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस समय सीमा को भी आगे बढ़ाया जा सकता है। 

विशाल आयात एवं घरेलू फसल की आवक के कारण दलहनों की कीमतों पर दबाव बढ़ने लगा है और इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आने की संभावना है।

यदि ऐसा हुआ तो सरकार को बफर स्टॉक के लिए किसानों से अच्छी मात्रा में दलहन खरीदने का सुनहरा अवसर मिल सकता है।