वैश्विक दलहन बाजार में हलचल: युद्ध का सीधा असर नहीं, लेकिन व्यापार प्रभावित

13-Mar-2026 11:33 AM

वैश्विक दलहन बाजार में हलचल: युद्ध का सीधा असर नहीं, लेकिन व्यापार प्रभावित
उड़द- मामूली सुधार (सभी भाव CIF इंडिकेटिव $/ मीट्रिक टन में)
★ म्यांमार से भारत आने वाली उड़द की कीमतों में पिछले सप्ताह के मुकाबले हल्की मजबूती दर्ज की गई है। 5 मार्च को उड़द FAQ का भाव 855 डॉलर प्रति टन था जो 12 मार्च को बढ़कर 860 डॉलर हो गया। इसी तरह SQ गुणवत्ता की उड़द 955 डॉलर से बढ़कर 960 डॉलर प्रति टन हो गई।
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देसी चना $20 तेज
★ ऑस्ट्रेलिया से भारत आने वाले देसी चने की कीमतों में अपेक्षाकृत तेज बढ़त देखने को मिली है। 5 मार्च को इसका भाव 555 डॉलर प्रति टन था, जो 12 मार्च तक बढ़कर 575 डॉलर प्रति टन हो गया। भारतीय बाजार में मांग सुधरने और वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितता के कारण कीमतों को समर्थन मिला है।
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काबुली चना- हल्की मजबूती
★ 42-44 कैलिबर काबुली चना भारत से तुर्की के लिए 1170 डॉलर से बढ़कर 1180 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि यूएई के लिए इसका भाव 1150 डॉलर से बढ़कर 1160 डॉलर प्रति टन रहा। वहीं 58-60 कैलिबर काबुली चना तुर्की के लिए 930 डॉलर से बढ़कर 940 डॉलर और यूएई के लिए 940 डॉलर से बढ़कर 950 डॉलर प्रति टन हो गया।
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तुअर- मामूली नरमी 
★ म्यांमार से भारत के लिए तुअर का भाव 890 डॉलर से घटकर 870 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि मोजाम्बिक से आने वाली तुअर 720 डॉलर से घटकर 710 डॉलर प्रति टन रह गई।
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पीली मटर- हल्का सुधार
★ कनाडा से भारत के लिए वेसल शिपमेंट का भाव 330 डॉलर से बढ़कर 335 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि रूस और यूक्रेन से आपूर्ति का भाव 340 डॉलर से बढ़कर 345 डॉलर प्रति टन हो गया।
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मसूर- अपेक्षाकृत बेहतर मजबूती 
★ कनाडा से भारत के लिए वेसल शिपमेंट 535 डॉलर से बढ़कर 545 डॉलर प्रति टन हो गया। कंटेनर शिपमेंट में और अधिक तेजी रही, जहां भाव 580 डॉलर से बढ़कर 600 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया से आने वाली मसूर भी 565 डॉलर से बढ़कर 585 डॉलर प्रति टन हो गई।
★ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का दलहन आपूर्ति पर अभी तक सीधा असर नहीं पड़ा है, लेकिन समुद्री मार्गों में बढ़ते जोखिम, मालभाड़े में वृद्धि और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण वैश्विक व्यापारिक माहौल अनिश्चित बना हुआ है।
★ इन परिस्थितियों के चलते भारतीय बाजारों में भी दलहनों के भाव में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है।