वैश्विक निर्यात बाजार पर भारतीय चावल का वर्चस्व बरकरार

14-Jan-2025 02:29 PM

नई दिल्ली । भारत पिछले अनेक वर्षों से दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश  बना हुआ है और समय गुजरने के साथ इसके निर्यात बाजार का दायरा भी तेजी से फैलता गया जिससे चावल के शिपमेंट में उत्तरोत्तर बढ़ोत्तरी होती रही।

वैश्विक स्तर पर सालाना करीब 500-550 लाख टन के बीच चावल का कारोबार (आयात-निर्यात) होता  है जिसमें अकेले भारतीय चावल के निर्यात का योगदान 200-220 लाख टन या करीब 40-42 प्रतिशत का रहता है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत में चावल का उत्पादन 2021-22 सीजन के 12.94 करोड़ टन से बढ़कर 2023-24 में 13.70 करोड़ टन पर पहुंच गया जिससे देश को चावल का निर्यात बढ़ाने में अच्छी सफलता प्राप्त हो रही है।

एक और यह है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान चावल की क्वालिटी में काफी सुधार आ गया है जिससे नए-नए देश इसकी खरीद करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। वैसे भी भारतीय चावल वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी मूल्य पर उपलब्ध रहता है। 

प्रीमियम क्वालिटी के बासमती चावल का तेजी से बढ़ता निर्यात भारत की पोजीशन को लगातार मजबूत बना रहा है। संसार के अनेक देशों में इसे पसंद किया जाता है और वहां भारत से बड़े पैमाने पर इसका आयात होता है।

वित्त वर्ष 2021-22 में बासमती चावल का निर्यात घटकर 39.40 लाख टन पर अटक गया था मगर 2023-24 में यह उछलकर 52.40 लाख टन पर पहुंच गया। निर्यात आय में भी 22 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।  

बासमती चावल का निर्यात मुख्यत: भारत एवं पाकिस्तान से होता है लेकिन पाकिस्तानी चावल की निर्यात मात्रा सीमित रहती है।

खाड़ी क्षेत्र के अधिकांश देश भारतीय चावल को प्राथमिकता देते हैं जबकि अमरीका और यूरोप में भी इसका आयात किया जाता है। चालू वित्त वर्ष के दौरान बासमती चावल का निर्यात प्रदर्शन पिछले साल से भी बेहतर चल रहा है।