वैश्विक बाजार भाव में गिरावट आने से खाद्य तेल की कीमतों में नरमी
07-Jan-2025 08:36 PM
नई दिल्ली । अन्तर्राष्ट्रीय बाजार (निर्यातक देशों) में भाव नरम पड़ने से घरेलू प्रभाग में भी प्रमुख खाद्य तेलों एवं तिलहनों के दाम में गिरावट या स्थिरता का माहौल देखा जा रहा है।
इसके तहत सरसों, मूंगफली एवं सोयाबीन जैसे तिलहनों तथा इससे निर्मित खाद्य तेलों की कीमतें नरम पड़ गई हैं। इसके साथ-साथ क्रूड पाम तेल तथा आरबीडी पामोलीन के दाम पर भी अब दबाव पड़ने लगा है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार यद्यपि क्रूड पाम तेल (सीपीओ) तथा आरबीडी पामोलीन का भाव अब भी ऊंचे स्तर पर मौजूद है लेकिन इसी ऊंची कीमत के कारण इसकी मांग प्रभावित होने लगी है।
वैसे सीमा शुल्क में हुई बढ़ोत्तरी तथा रुपए की विनिमय दर में आई गिरावट के कारण खाद्य तेलों का आयात महंगा बैठने लगा है।
आयातित खाद्य तेलों का भाव पिछले सप्ताह के 1240/1245 डॉलर प्रति टन से गिरकर अब 1200/1205 डॉलर प्रति टन पर आ गया है।
इसके रिस्पॉन्स में भारत सरकार के तेलों का न्यूतनम आयात मूल्य बढ़ाते हुए विनिमय दरों को उसके हिसाब से एडजस्ट कर दिया है। इसके फलस्वरूप आयातित तेलों के खर्च में करीब 150 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफ हो गया।
सीपीओ तथा पामोलीन के दाम में हुई बढ़ोत्तरी के कारण उसकी खपत में गिरावट देखी जा रही है। यदि उसकी कीमतों में तेजी-मजबूती का रुख बरकरार रहा तो खपत में और भी कमी आ सकती है।
ऊंचे दाम के कारण सूरजमुखी तेल के आयात में भी कमी आई है। पाम तेल एवं सूरजमुखी तेल का आयात घटने से घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने के प्रति चिंता बढ़ गई है।
वैसे दिसम्बर 2024 के दौरान सोयाबीन तेल के आयात में थोड़ी बढ़ोत्तरी हुई। इधर भारत में तेल मिलें अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल रही हैं क्योंकि मंडियों में उम्मीद के अनुरूप तिलहनों की आवक नहीं हो रही है। सोया डीओसी तथा अन्य ऑयल मील का भाव कमजोर पड़ने से भी मिलर्स की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है।
