ऊंची कीमतों के कारण चना पर भंडारण सीमा लागू होने की संभावना

28-May-2024 11:21 AM

नई दिल्ली । आपूर्ति के पीक सीजन होने के बावजूद प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में आवक की रफ्तार सुस्त पड़ने तथा कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बनने से चिंतित केन्द्र सरकार अब देसी चना पर भंडार सीमा (स्टॉक लिमिट) लागू करने पर विचार कर सकती है।

चना का थोक मंडी भाव सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (5440 रुपए प्रति क्विंटल) से करीब 35 प्रतिशत ऊंचा चल रहा है। घरेलू उत्पादन में गिरावट आने तथा किसानों द्वारा स्टॉक रोके जाने से चना की आपूर्ति कम ही रही है।

ज्ञात हो कि देश में दलहनों के कुल उत्पादन में चना का योगदान 50 प्रतिशत के करीब रहता है। सरकार देसी चना के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति पहले ही दे चुकी है लेकिन घरेलू बाजार पर इसका कोई मनोवैज्ञानिक असर नहीं पड़ रहा है।

केन्द्र सरकार के पास चना का स्टॉक कम रह गया है और इस बार सरकारी खरीद भी बहुत कम हुई है। मध्य प्रदेश एवं राजस्थान जैसे प्रमुख उत्पादक प्रांतों में चना का भाव बढ़कर 7200-7300 रुपए प्रति क्विंटल के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया है

जबकि निकट भविष्य में इसमें ज्यादा नरमी आने की संभावना नहीं है। हाल के वर्षों में पहली बार चना का दाम उछलकर 7000 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंचा है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार चना का उत्पादन घटकर इस बार 121.60 लाख टन रह गया जबकि उद्योग-व्यापार क्षेत्र का मानना है कि वास्तविक उत्पादन 100 लाख टन से भी कम हुआ है। फसल की कटाई-तैयारी पहले ही पूरी हो चुकी है।

एक विश्लेषक के अनुसार चालू माह के दौरान अब तक विभिन्न मंडियों में चना का भाव करीब 13 प्रतिशत बढ़ चुका है क्योंकि इसकी मांग एवं आपूर्ति के बीच अंतर बना हुआ है।

चना की अमंग तो मजबूत बनी हुई है मगर आवक कम हो रही है। नैफेड को मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं महाराष्ट्र में पूर्व निर्धारित मूल्य पर चना खरीदने के लिए कहा गया है। हालात बिगड़ने पर सरकार स्टॉक लिमिट के बारे में सोच सकती है।