दलहन-तिलहन का उत्पादन बढ़ाने हेतु हाइब्रिड टेक्नोलॉजी अपनाने की जरूरत पर जोर

09-Jan-2025 04:16 PM

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव ने कहा है कि दलहनों-तिलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने तथा विदेशों से खाद्य तेलों और दलहनों के आयात पर निर्भरता को कम या खत्म करने के लिए हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की गति तेज करने की आवश्यकता है।

लेकिन इस उन्नत कृषि विधियों को अपनाने तथा बड़े पैमाने पर क्रियान्वित करने में किसानों द्वारा झेली जा रही चुनौतियों को दूर करना जरूरी है।

मुख्य सचिव के मुताबिक अनेक मामलों से इस टेक्नोलॉजी का किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार अभी तक संभव नहीं हो पाया है। इस पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है। 

अब तक किए गए प्रयासों तथा उसके सुखद परिणामों से ज्यादा जरुरी है कि अब दलहन तिलहन फसलों के उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोत्तरी के लिए समेकित कोशिश की जाए।

भारत चावल, गेहूं, चीनी एवं मोटे अनाज आदि के उत्पादन में तो आत्मनिर्भर हो गया है लेकिन दलहन-तिलहन की पैदावार घरेलू मांग एवं जरूरत से काफी कम हो रही है और इसलिए विदेशों से विशाल मात्रा में खाद्य तेलों दलहनों की आयात की आवश्यकता रहती है।

वस्तुतः भारत दुनिया में इसका सबसे प्रमुख आयातक देश बना हुआ है और इसके आयात पर प्रति अरबो डॉलर खर्च हो रहा है। 

मुख्य सचिव के अनुसार यद्यपि सरसों के कुछ हाइब्रिड बाजार में उपलब्ध है मगर उसका प्रदर्शन बेहतरीन नहीं देखा जा रहा है। उसमें कुछ और सुधार की आवश्यकता है।

हाइब्रिड सीड के साथ समस्या यह है कि प्रत्येक सीजन में किसानों को उसकी नई खरीद करनी पड़ती है जिस पर काफी खर्च बैठता है।

लेकिन अब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी तकनीक के विकास का प्रयास किया जा रहा है जिससे किसान हाइब्रिड बीजों को बचाकर रखने तथा आगामी सीजन में इसका उपयोग करने में सक्षम हो सकेंगे। इससे बीज पर खर्च होने वाली राशि की बचत हो जाएगी।