दलहनों का भाव ऊँचे स्तर पर स्थिर रहने की संभावना

14-May-2024 12:41 PM

नई दिल्ली । पीली मटर एवं मसूर का भारी आयात होने, देशी चना के शुल्क युक्त आयात की अनुमति दिये जाने, रबी कालीन फसलों की आपूर्ति का पीक सीजन होने तथा तुवर-उड़द का आयात नियमित रूप से होने के कारण घरेलू प्रभाग में दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने तथा कीमतों में नरमी आने की उम्मीद की जा रही थी

लेकिन फ़िलहाल इसके कोई ठोस संकेत नहीं मिल रहे है। व्यापार विश्लेषकों के अनुसार देशी चना के शुल्क युक्त आयात की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है और ऑस्ट्रेलिया में इसका दाम ऊँचा होने लगा है।

इधर घरेलू प्रभाग में रबी कालीन प्रमुख दलहनों- चना, मसूर एवं मटर के नए माल की आपूर्ति का पीक सीजन जरूर चल रहा है मगर उत्पादकों द्वारा स्टॉक रोके जाने से थोक मंडियों में इसकी आवक का दबाव नहीं देखा जा रहा है।

सरकारी एजेंसी-नैफेड के पास भी चना का स्टॉक घटकर काफी नीचे आ गया है और ऊंचे भाव के कारण उसे मंडियों में किसानों से इसकी खरीद करने में ज्यादा सफलता नहीं मिल रही है।

चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5440 रूपए प्रति क्विंटल नियत किया है जबकि थोक मंडी भाव 6000-6100 रूपए प्रति क्विंटल चल रहा है सरकार का इरादा तत्काल डेढ़-दो लाख टन चना का आयत करवाने का है। 

जहां तक तुवर एवं उड़द की बात है तो घरेलू उत्पादन घटने तथा विदेशो से पर्याप्त मात्रा में आयात नहीं होने के कारण इसका भाव ऊंचे स्तर पर बरकरार है।

सरकारी उपरसों का परिणाम सिर्फ इतना देखा जा रहा है कि दाल-दलहनों के दाम में बेतहाशा तेजी पर काफी हद तक अंकुश लग गया है लेकिन कीमतों में अभी ज्यादा नरमी का माहौल नहीं बन पाया है। दलहनों के आपूर्ति पक्ष को मजबूत बनाने में सरकार कोई भी कसर नहीं छोड़ रही है। 

समझा जाता है कि घरेलू उत्पादन में गिरावट को देखते हुए भारतीय किसान आगामी समय में भाव और तेज होने की उम्मीद से चना का स्टॉक रोकने का प्रयास कर रहे है।

आस्ट्रेलिया और तंजानिया जैसे प्रमुख निर्यातक देशों में देशी चना का सिमित स्टॉक बचा हुआ है जबकि अगली नई फसल आने में काफी देर है। तूवर का भी वही हाल है। म्यांमार को छोड़कर अन्य निर्यातक  (अफ्रीकी) देशो में स्टॉक काफी घट चुका है।