श्रीलंका में पाम की खेती पर लागू प्रतिबंध हटाए जाने की संभावना
11-May-2026 05:14 PM
मुम्बई। एशियन पाम ऑयल अलायंस (आपोआ) का कहना है कि श्रीलंका में हाल के घटनाक्रमों से संकेत मिलता है कि वहां सरकार ऑयल पाम की व्यवसायिक खेती पर लगे प्रतिबंध को हटाने पर गम्भीरतपूर्वक विचार कर रही है। यह एक स्वागत योग्य निर्णय होगा। फिलहाल इस आशय के प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति और सस्टैनेबिलिटी से सेफगार्ड प्राप्त होना बाकी है। श्रीलंका के लिए यह एक सकारात्मक एवं प्रगतिशील कदम होगा जो उसकी खाद्य तेल सुरक्षा को मजबूत बनाएगा, ग्रामीण क्षेत्र में किसानों की आजीविका को सहयोग-समर्थन देगा, विदेशी खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता को घटाएगा और एशिया में विज्ञान आधारित सस्टेनेबल कृषि को प्रोत्साहन करेगा।
श्रीलंका में पाम की खेती पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद विदेशों से भारी मात्रा में पाम तेल का आयात किया जाता है। हाल के वर्षों में वहां अनेक बार कृषि वैज्ञानिकों एवं उद्योग संगठनों की बातचीत हो चुकी है जिसमें प्रमाण आधारित नीतिगत निर्णय लेने और सस्टेनेबल उत्पादन का फ्रेमवर्क तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
आपोआ के चेयरमैन का कहना है कि ऐसी सूचना मिल रही है कि श्रीलंका सरकार ऑयल पाम की खेती पर लगे प्रतिबंध पर पुनर्विचार कर रही है जो एक संतुलित और अग्रगामी सोच है। वर्तमान समय की वास्तविक चुनौती पाबन्दी लगाना नहीं है बल्कि विज्ञान के माध्यम से निरंतरता को सुनिश्चित करने की है। इसमें सभी सम्बन्ध पक्षों के साथ सरकार की जिम्मेदारी भी बनती है। सस्टेनेबल पाम तेल आज खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
चेयरमैन के मुताबिक सभी तिलहनों एवं तेल धारक जिंसों में ऑयल पाम से पाम तेल की औसत रिकवरी दर सबसे ऊंची (प्रति हेक्टेयर के संदर्भ में) रहती है। एक बार जब इसके पेड़ में फल लगने शुरू होते हैं तो अगले 20-25 साल तक इसका सिलसिला जारी रहता है। भारत में पाम उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है जिसका सुखद परिणाम भविष्य में सामने आएगा। श्रीलंका को भी इससे सीख लेने की जरूरत है।
