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07-Oct-2026 04:51 PM
मुम्बई। एक अग्रणी उद्योग संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) ने सितम्बर-अक्टूबर 2026 के दो महीनों में देश के अंदर 30-32 लाख टन खाद्य तेलों के आयात का अनुमान लगाया है जिससे 2025-26 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) में इसका कुल आयात बढ़कर 165 लाख टन पर पहुंच जाने की संभावना है।
एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष के अनुसार आगामी समय में खाद्य तेलों का घरेलू एवं वैश्विक बाजार भाव ऊंचा और तेज रह सकता है। मलेशिया में पाम तेल का बकाया अधिशेष स्टॉक उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है जबकि निर्यात शिपमेंट में भारी बाधा पड़ने के कारण रूस तथा यूक्रेन में सूरजमुखी तेल का स्टॉक बढ़ता जा रहा है।
'सी' के अध्यक्ष के अनुसार यदि पाम तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी होती है तो कुछ परम्परागत उपभोक्ता सोयाबीन तेल की तरफ मूड़ सकते हैं। जहां तक सूरजमुखी तेल का सवाल है तो रूस-यूक्रेन से काला सागर जलमार्ग के जरिए इसका निर्यात शिपमेंट लगभग ठप्प पड़ गया है जबकि ये दोनों इसके सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश हैं। इससे भारत में सूरजमुखी तेल की आपूर्ति करने की संभावना है। अर्जेन्टीना से इसका आयात जारी रहेगा।
कीमतों में ज्यादा तेजी आने पर भारत में अगले मार्केटिंग सीजन के दौरान पाम तेल के आयात में 10 लाख टन तक की गिरावट आ सकती है जबकि अगले तीन वर्षों में क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का घरेलू उत्पादन बढ़कर 12 लाख टन पर पहुंच जाने की संभावना है। आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में ऑयल पाम का बागानी क्षेत्र तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
अभी त्यौहारी सीजन की वजह से खाद्य तेलों की घरेलू मांग एवं खपत में अच्छी बढ़ोत्तरी हो रही है। सरकार ने हाल ही में खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती की है और तेल उद्योग को इस शुल्क कटौती का लाभ सीधे आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए कहा है।