सरसों तथा इसके तेल की कीमतों में मजबूती रहने की संभावना
09-Jan-2025 08:29 PM
नई दिल्ली । बिजाई क्षेत्र में गिरावट आने तथा मंडियों में आवक कम होने से सरसों का भाव काफी हद तक मजबूत बना हुआ है। आगामी दिनों में भी इसके जोरदार गिरावट आने की संभावना नहीं है लेकिन 100-200 रुपए प्रति क्विंटल का सामान्य उतार-चढ़ाव बरकरार रह सकता है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी सीजन की सबसे प्रमुख तिलहन फसल-सरसों का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 93.73 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 88.50 लाख हेक्टेयर पर अटक गया है जबकि तिलहन फसलों का कुल रकबा भी 101.64 लाख हेक्टेयर से गिरकर 96.74 लाख हेक्टेयर रह गया है। सरसों की बिजाई लगभग समाप्त हो चुकी है।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मंडियों में सरसों की औसत दैनिक आवक घटकर 2 लाख बोरी (50 किलो की प्रत्येक बोरी) से भी नीचे आ गई है।
किसानों एवं स्टॉकिस्टों / मिलर्स के पास तिलहन का सीमित स्टॉक बचा हुआ है लेकिन सरकारी एजेंसियों के पास करीब 10 लाख टन का स्टॉक मौजूद है। किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी गई 20 लाख टन सरसों का आधा भाग बिक चुका है। शेष सरसों को बेचने का प्रयास जारी है।
उद्योग-व्यापार संगठनों ने सरसों का उत्पादन अनुमान 2023-24 सीजन के लिए 121 लाख टन से घटाकर अब 115 लाख टन निर्धारित कर दिया है।
आमतौर पर फरवरी से सरसों की नई फसल की छिटपुट आवक शुरू हो जाती है जबकि मार्च से मई के तीन महीनों में इसकी जोरदार आपूर्ति होती है।
केन्द्र सरकार ने सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2023-24 सीजन के 5650 रुपए प्रति क्विंटल से 300 रुपए बढ़ाकर 2024-25 सीजन के लिए 5950 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है लेकिन फिर भी इसकी खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घट गया।
यदि सरसों एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों में वायदा व्यापार पर लगे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय लिया जाता है तो कीमतों में तेजी का माहौल बन सकता है।
शीघ्र ही लग्नसरा एवं मांगलिक उत्सवों का सीजन शुरू होने वाला है जिसमें सरसों तेल की मांग एवं खपत बढ़ने की उम्मीद है। जाड़े के दिनों में अक्सर सरसों तेल का अधिक उपयोग होता रहा है।
