साप्ताहिक समीक्षा- लालमिर्च

21-Mar-2026 08:17 PM

स्टॉकिस्टों की मांग से लालमिर्च तेज : उत्पादन कम 

नई दिल्ली। चालू सप्ताह के दौरान लालमिर्च की कीमतों में तेजी रही। उत्पादक केन्द्रों पर पैदावार में कमी आने के कारण मंडियों में आवक कम हो रही है। जबकि भविष्य में अच्छी तेजी आने के अनुमानों के चलते स्टॉकिस्टों की मांग अच्छी बनी हुई है। इसके अलावा बांग्ला देश की खरीद भी चल रही है। वर्तमान में चीन की लिवाली बाजार में नहीं है। 
आंध्र प्रदेश
लालमिर्च के प्रमुख उत्पादक राज्य आंध्र प्रदेश में लालमिर्च की बिजाई गत वर्ष की तुलना में कम रहने के कारण उत्पादन में भी कमी आने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। जिस कारण से आंध्र प्रदेश में इस वर्ष लालमिर्च का उत्पादन सवा करोड़ बोरी होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं जबकि गत वर्ष उत्पादन अनुमान डेढ़ करोड़ बोरी के लगाए गए थे। आंध्र प्रदेश की प्रमुख मंडी गुंटूर में वर्तमान में नए मालों की औसतन दैनिक आवक 70/80 हजार बोरी की हो रही है और तेजा क्वालिटी का भाव 192 रुपए प्रति किलो  पर बोला जाने लगा है जोकि चालू सप्ताह के शुरू में 191 रुपए चल रहा था। फरवरी माह के शुरू में तेजा का भाव 182 रुपए बोला जा रहा था। 
तेलंगाना 
चालू सीजन के दौरान तेलंगाना में भी लालमिर्च का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम रहेगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वर्ष तेलंगाना में उत्पादन 45/50 लाख बोरी के आसपास रहेगा। जबकि गत वर्ष उत्पादन 60/65 लाख बोरी का माना गया था। वर्तमान में खम्मम मंडी में लालमिर्च की आवक 30/32 हजार बोरी की दैनिक हो रही है। और तेजा का भाव 191/192 रुपए पर बोला जा रहा है। फरवरी माह के शुरू में भाव 184 रुपए बोला जा रहा था। वारंगल में भी चालू सप्ताह के दौरान लालमिर्च तेजा का भाव 195 रुपए से तेजी के साथ 198 रुपए पर बोला गया। वारंगल में साप्ताहिक आवक लगभग 1.50 लाख बोरी की रही। दिल्ली बाजार में हालांकि व्यापार कम रहा लेकिन उत्पादक केन्द्रों के तेज समाचार मिलने के कारण भाव मजबूत रहे। 
मन्दा-तेजी 
जानकारों का कहना है कि लालमिर्च की कीमतों में अधिक मंदे के आसार नहीं है। क्योंकि पैदावार कम होने के अलावा बकाया स्टॉक भी कम है। जिस कारण से भविष्य में लालमिर्च की कीमतों में अच्छी तेजी की संभावना है। क्योंकि संभावना व्यक्त की जा रही है कि आगामी दिनों में चीन की लिवाली भी बाजार में बढ़ेगी। चीन की लिवाली आने के पश्चात कीमतों में 20/25 रुपए प्रति किलो की तेजी आने के व्यापार के अनुमान लगाए जा रहे है। 
निर्यात 
चालू वित्त वर्ष 2025-26 के प्रथम नौ माह में लालमिर्च का निर्यात मात्रात्मक रूप में 23 प्रतिशत बढ़ा है लेकिन भाव कम मिलने के कारण आय में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-दिसम्बर- 2025 में लालमिर्च का निर्यात 536760 टन का हुआ है और निर्यात से प्राप्त आय 7548.83 करोड़ की रही। जबकि अप्रैल-दिसम्बर- 2024 में निर्यात 436023 टन का हुआ था और प्राप्त आय 7111.97 करोड़ की रही थी। वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान लालमिर्च का कुल निर्यात 715506 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 11404.90 करोड़ की रही।