साप्ताहिक समीक्षा-गेहूं
13-Jan-2025 10:17 AM
तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद गेहूं का भाव एमएसपी से काफी ऊंचा
नई दिल्ली । केन्द्र सरकार गेहूं के घरेलू बाजार भाव में तेजी को नियंत्रित करने तथा इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने का हर संभव प्रयास कर रही है लेकिन इसके बावजूद कीमतों में तेजी-मजबूती का सिलसिला बरकरार है। वर्ष 2022 से ही गेहूं एवं इसके उत्पादों के व्यापारिक निर्यात पर प्रतिबंध लगा हुआ है। गेहूं पर बार-बार भंडारण सीमा का आदेश भी लागू होता रहा है। सरकार भारत ब्रांड के तहत 30 रुपए प्रति किलो की दर से गेहूं के आटे की बिक्री सुनिश्चित कर रही है उसके अलावा दिसम्बर 2024 के प्रथम सप्ताह से खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत प्रत्येक सप्ताह एक लाख टन गेहूं की बिक्री की जा रही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के अंतर्गत देश के 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त में खाद्यान्न उपलब्ध करवाया जा रहा है।
दिल्ली
दिल्ली में 4 जनवरी 2025 को यूपी / राजस्थान के गेहूं का भाव उछलकर 3340/3360 रुपए प्रति क्विंटल की ऊंचाई पर पहुंच गया है जो 10 तक आते-आते 80 रुपए घटकर 3260/3280 रुपए प्रति क्विंटल रह गया।
मध्य प्रदेश
दूसरी ओर मध्य प्रदेश के इंदौर में गेहूं का दाम 70 रुपए बढ़कर 3000/3370 रुपए तथा उज्जैन में 150 रुपए उछलकर 3100/3300 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया।
राजस्थान
राजस्थान की मंडियों में गेहूं का भाव पिछले स्तर पर ही बरकरार रहा जबकि उत्तर प्रदेश की प्रमुख मंडियों में इसके दाम में 20 से 40 रुपए तक का उतार-चढ़ाव देखा गया। वहां शाहजहांपुर मंडी में गेहूं का दाम 14 रुपए गिरकर 2951 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया।
बिजाई
रबी सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न- गेहूं की बिजाई पूरी हो चुकी है और इसका क्षेत्रफल सुधरकर 319 लाख हेक्टेयर पर पहुंचने की सूचना है। केन्द्र सरकार ने 2024-25 के रबी सीजन में 1150 लाख टन गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य नियत किया है जबकि इसकी खरीद का लक्ष्य महज 300 लाख टन निर्धारित किया गया है।
आवक
कुछ राज्यों में मार्च से गेहूं के नए माल की आवक शुरू होने की संभावना है जबकि अप्रैल से इसकी जोरदार आवक होने लगेगी। नई फसल की कटाई-तैयारी एवं मंडियों में आपूर्ति शुरू होने तक गेहूं के दाम में ज्यादा नरमी आना मुश्किल लगता है क्योंकि सीमित आवक के बीच मिलर्स-प्रोसेसर्स की मजबूत मांग बरकरार रहेगी।
