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05-Oct-2026 11:06 AM
मुम्बई। अल नीनो मौसम चक्र की ताकत, मजबूती एवं तीव्रता लगातार बढ़ती जा रही है और इसके 'सुपर' अल नीनो में बदलने की प्रबल संभावना है। इससे दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया तथा लैटिन अमरीका के देशों के मौसम पर गहरा प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है जिससे ब्राजील, भारत एवं थाईलैंड जैसे शीर्ष उत्पादक देशों में गन्ना एवं चीनी का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि चीनी का वैश्विक उत्पादन 'अधिशेष' की श्रेणी से नीचे आते हुए 'घाटे' की श्रेणी में आ सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि पहले चीनी का वैश्विक उत्पादन इसकी मांग एवं खपत से ज्यादा हो रहा था मगर 2026-27 के सीजन में कम होगा और इसलिए बकाया स्टॉक का इस्तेमाल करना पड़ेगा। इससे वैश्विक बाजार में चीनी की मांग एवं आपूर्ति के बीच समीकरण जटिल बन सकता है और चीनी की कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल रह सकता है।
कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के वैश्विक बाजार मूल्य में जुलाई से अब तक 25 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हो चुका है। दरअसल अल नीनो के असर से जहां उत्तरी गोलार्द्ध के देशों में भयंकर सूखे का संकट पैदा होता है वहीं दक्षिण गोलार्द्ध के देशों में अत्यन्त मूसलाधार बारिश एवं विनाशकारी बाढ़ का खतरा रहता है। मौसम की यह दोनों ही स्थिति गन्ना की फसल के लिए उपयुक्त नहीं है। चीनी के प्रमुख आयातक देशों को कीमत वृद्धि से कठिनाई हो सकती है।