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05-Oct-2026 11:40 AM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा घोषित 2026-27 के रबी सीजन की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को अपर्याप्त बताते हुए एक कृषक संगठन ने उसे किसानों का अपमान करार दिया है और उसे मानने से इंकार कर दिया है। किसान संगठन का कहना है कि गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में मात्र 25 रुपए प्रति क्विंटल (25 पैसे प्रति किलो) का इजाफा किया गया है और फिर भी सरकार दावा कर रही है कि यह एमएसपी गेहूं के उत्पादन की लागत से 106 प्रतिशत अधिक है। यह दावा खाद्यान्न उत्पादकों के लिए जले पर नमक छिड़कने जैसा है।
कृषक संगठन ने किसानों एवं ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं से सरकारी आदेश का विरोध करने का आग्रह किया है। संगठन के अनुसार सरकारी तौर पर एमएसपी की गणना A2+FL के संदर्भ में इनपुट खर्च के 1.5 गुणा के स्तर पर आधारित होती है। इस फार्मूले में किसानों द्वारा बीज, खाद (उर्वरक) कीटनाश दवाएं एवं सिंचाई आदि (A2) पर खर्च की जाने वाली राशि शामिल होती है इसके साथ किसानी-मजदूरी (एफ एल) को भी इसमें सम्मिलित किया जाता है लेकिन इसमें किसानों की अपनी भूमि की रेंटल वैल्यू और उसकी पूंजी पर लगने वाले ब्याज को इस फार्मूले की परिधि से बाहर रखा गया है।
संगठन का कहना है कि एमएसपी के निर्धारण में समेकित एवं व्यापक C2 कॉस्ट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। संगठन के अनुसार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) का आंकड़ा भी बताता है कि किसानों को लागत खर्च के ऊपर 106 प्रतिशत का नहीं बल्कि 43 प्रतिशत का ही मार्जिन प्राप्त हो रहा है।