रुई का अधिशेष स्टॉक घटकर 20 लाख गांठ रह जाने का अनुमान

13-May-2024 02:10 PM

मुम्बई । एक अग्रणी व्यापारिक संगठन -कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि उत्पादन घटने तथा निर्यात एवं घरेलू उपयोग में बढ़ोत्तरी होने के कारण 2023-24 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितंबर) के अंत में रुई का बकाया अधिशेष स्टॉक घटकर 20 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) पर सिमट सकता है जो हाल के वर्षो का न्यूनतम स्तर होगा। 

एसोसिएशन की नवीनतम मासिक रिपोर्ट के अनुसार पिछले सीजन के अंत में 28.90 लाख गांठ कपास का बकाया स्टॉक मौजूद था।

इससे पूर्व 2003-04 के मार्केटिंग सीजन में कपास का स्टॉक 21 लाख टन गांठ आंका गया था जो वर्ष 1990 की गणना आरम्भ होने के बाद का सबसे निचला स्तर था।

चालू सीजन  का स्टॉक उससे भी कम रहने की संभावना है देश में 2002-03 के सीजन से बी टी कॉटन की खेती आरम्भ हुई थी और 2003-04 में यह जोर नहीं पकड़ पाई थी लेकिन उसके बाद से उत्पादन एवं स्टॉक तेजी से बढ़ने लगा था। 

उल्लेखनीय है कि कपास उत्पादन एवं उपयोग समिति (सीसीपीसी) ने मार्श को अपनी समीक्षा बैठक में 2023-24 सीजन के अंत में 52.27 लाख गांठ रुई के बकाया अधिशेष स्टॉक का अनुमान लगाया था जबकि उसने पिछले सीजन के बकाया स्टॉक एवं उत्पादन का अनुमान भी ऊंचा व्यक्त किया था।

एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार इस बार बकाया स्टॉक घटकर रिकार्ड निचले स्तर पर आने का प्रमुख कारण घरेलू उपयोग एवं निर्यात में भारी बढ़ोत्तरी होना माना जा रहा है।

अनेक नई इकाइयां स्थापित हो रही है और देश में प्रतिवर्ष कॉटन मिलो में 10-12 लाख नए स्पिनडल्स जुड़ रहे है। इससे रुई की सालाना खपत में 12-15 लाख गांठ की बढ़ोत्तरी हो रही है

इसके आलावा चालू मार्केटिंग सीजन में अप्रैल 2024 तक रुई के निर्यात में 125 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोत्तरी हुई। घरेलू उत्पादन भी पिछले सीजन से कम हुआ था।

देश के 10 प्रांतो-गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य-प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक एवं तमिलनाडु में बी सी कॉटन की व्यवसायिक खेती होती है जबकि उड़ीसा में केवल परम्परागत किस्मो की कपास का उत्पादन होता है। घरेलू एवं निर्यात मांग बढ़ने से रुई का भाव मजबूत होने लगा है।