पंजाब में रोगों-कीड़ों से गेहूं की फसल को खतरा
06-Jan-2025 03:07 PM
चंडीगढ़ । पंजाब में गेहूं की फसल पर इस बार चौतरफा खतरा देखा जा रहा है। एक तो वहां धान की कटाई देर से होने के कारण गेहूं की बिजाई लेट हो गई जिससे फसल की औसत उपज दर में गिरावट आने की आशंका है और दूसरे, फसल के बिजाई क्षेत्र में भी कुछ कमी आ गई।
इसके अलावा गेहूं की फसल पर पहले पिंक स्टेम बोरर कीट का आघात हुआ और अब येलों रस्ट रोग का प्रकोप देखा जा रहा है।
इतना ही नहीं बल्कि दिसम्बर के अंतिम सप्ताह के दौरान वहां अच्छी बारिश भी हुई जो ऊपरी क्षेत्र में तो फसल के लिए लाभदायक मानी जा रही है मगर निचले इलाकों में पानी का जमाव होना अच्छा नहीं माना गया।
अब एक बार फिर वहां वर्षा का दौर शुरू हो गया है। इससे कुछ क्षेत्रों में फसल को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।
पंजाब सहित अन्य पश्चिमोत्तर राज्यों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और वर्षा भी हो रही है। इससे कीड़ों-रोगों का प्रकोप कुछ घट सकता है लेकिन तापमान काफी नीचे आने से फसल के विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। खेतों में जमा पानी को सूखने एवं फसल की उन्नति-प्रगति के लिए अब धूप की आवश्यकता पड़ेगी।
उल्लेखनीय है कि है कि पंजाब न केवल केन्द्रीय पूल में गेहूं का योगदान देने वाला सबसे प्रमुख राज्य है बल्कि वहां इसकी उपज दर भी सर्वाधिक ऊंची रहती है।
आमतौर पर ठंडा मौसम एवं नियमित अंतराल पर होने वाले बौछार को फसल के लिए अच्छा माना जाता है लेकिन इसके साथ-साथ धूप की जरूरत भी पड़ती है।
अभी तक पंजाब के अधिकांश इलाकों में घने कोहरे, धुंध या ओलावृष्टि का गंभीर प्रकोप नहीं देखा गया इसलिए फसल-काफी हद तक सुरक्षित है। जनवरी से मार्च तक का मौसम गेहूं की फसल के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण साबित होगा।
