नवम्बर में कुछ नरम पड़ने के बाद गेहूं के दाम में पुनः वृद्धि का माहौल
08-Jan-2025 08:00 PM
नई दिल्ली । सरकारी स्टॉक से सीमित बिक्री होने तथा मंडियों में आवक की गति धीमी रहने से गेहूं का भाव पुनः तेज होने लगा है।
दिसम्बर में खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के दोबारा चालू होने की घोषणा के दबाव से नवम्बर में गेहूं का भाव कुछ समय के लिए नरम पड़ गया था लेकिन दिल्ली में अब यह पुनः बढ़कर 3300 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गया है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार इस बार गेहूं के दाम में तेजी-मजबूती का माहौल कुछ ज्यादा दिनों तक बरकरार रहने की संभावना है क्योंकि बाजार में हस्तक्षेप करने की सरकार की क्षमता कम है।
उसके पास इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का भारी-भरकम अधिशेष स्टॉक उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा राजस्थान एवं मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर किसानों को 125 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा जिससे व्यापारियों को काफी ऊंचे दाम पर गेहूं खरीदने के लिए विवश होना पड़ेगा।
मंडी शुल्क सहित अन्य टैक्स, भंडारण एवं परिवहन खर्च तथा बैंक ऋण पर ब्याज आदि को जोड़ने पर गेहूं का कुल खर्च उछलकर काफी ऊंचे स्तर पर पहुंचेगा।
गेहूं की बिजाई लगभग समाप्त हो चुकी है और पिछले साल के मुकाबले इस बार क्षेत्रफल में कुछ बढ़ोत्तरी हुई है। इससे उत्पादन कुछ बेहतर होने के आसार हैं लेकिन सरकार फिलहाल कोई जोखिम उठाने के मूड में नहीं है क्योंकि आगामी दो-तीन महीनों का मौसम इसकी फसल को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार 2023-24 के रबी सीजन में 1132.90 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ जबकि 2024-25 सीजन के लिए 1150 लाख टन के रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उद्योग-व्यापार क्षेत्र को सरकारी उत्पादन आंकड़े पर संदेह है। ज्ञात हो कि मई 2022 से ही गेहूं के व्यापारिक निर्यात पर प्रतिबंध लगा हुआ है और इसकी सरकारी खरीद में भी मामूली बढ़ोत्तरी हुई।
इसके बावजूद मंडियों में गेहूं की बहुत कम आवक हो रही है और इसका भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी ऊंचे स्तर पर बरकरार है।
