नव वर्ष के अवकाश के बाद चावल के वैश्विक बाजार में सक्रियता बढ़ने की उम्मीद

06-Jan-2025 06:29 PM

नई दिल्ली । पिछले सप्ताह भारत सहित अन्य एशियाई देशों में चावल का निर्यात ऑफर मूल्य या तो स्थिर रहा या कुछ घट गया क्योंकि एशिया तथा अफ्रीका के अधिकांश आयातक नव वर्ष की छुट्टी मना रहे थे।

अब अवकाश का समय समाप्त होने के बाद वे पुनः चावल की खरीद में सक्रियता दिखा सकते हैं जिससे इसके दाम में सुधार आने की उम्मीद है। 

भारतीय चावल का निर्यात ऑफर मूल्य लगातार तीसरे सप्ताह घटते हुए पिछले 17 महीनों के निचले स्तर पर आ गया था। इस बीच रुपए का भी अवमूल्यन हो गया इसलिए निर्यातकों के मार्जिन पर कोई खास असर नहीं पड़ा लेकिन मांग कमजोर रहने से सौदे काफी कम हुए।

भारत के 5 प्रतिशत टूटे सेला चावल का फ्री ऑन बोर्ड औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य घटकर 436/442 डॉलर प्रति टन तथा सफेद चावल का दाम गिरकर 440/449 डॉलर प्रति टन रह गया।

भारत से चावल के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों-नियंत्रणों एवं शुल्क के समाप्त होने से इसके शिपमेंट में शानदार बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है जिसका सीधा एवं गंभीर प्रतिकूल असर थाईलैंड पर पड़ने की आशंका है।

इस वर्ष उसके चावल निर्यात में 30 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आने की संभावना है क्योंकि भारत अपने खोए हुए बाजार को दोबारा हासिल कर लेगा जिस पर पिछले साल थाईलैंड ने कब्जा कर लिया था।

वैसे भी उसके 5 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात ऑफर मूल्य 490/502 डॉलर प्रति टन पर चल रहा है जो भारत से काफी ऊंचा है।

भारत को म्यांमार तथा वियतनाम से कोई खतरा नहीं है क्योंकि उसका चावल सीमित देशों में पहुंचता है लेकिन पाकिस्तान से कुछ चुनौती मिल सकती है क्योंकि भारत और पाकिस्तान के चावल का भाव काफी हद तक समान रहता है। अफ्रीकी देशों में भारतीय चावल को काफी पसंद किया जाता है।