मसालों में कीटनाशकों का अंश इसकी शुद्धता को प्रभावित करेगा
13-May-2024 05:35 PM
नई दिल्ली । भारत में पिछले एक दशक के दौरान विभिन्न खाद्य उत्पादों की खुदरा एवं गुणवत्ता के लिए प्रति उपभोक्ताओं में जागरूकता काफी बढ़ी है और सरकार ने भी इसके लिए कई नियम-कानून बनाए है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा समय-समय पर खाद्य पदार्थों में मिलावट की रोकथाम एवं क्वालिटी के ऊंचे स्तर को बरकरार रखने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जाते हैं तथा फूड प्रोसेसर्स एवं ऑपरेटर्स द्वारा इसका पूरी तरह पालन भी किया जाता है।
यही कारण है कि आज वैश्विक बाजार में भारतीय खाद्य उत्पादों एवं मसालों आदि की जबरदस्त मांग बनी हुई है।सिंगापुर एवं हांगकांग में दो भारतीय मसाला कंपनियों के दो-तीन उत्पादों में एथीलीन ऑक्साइड का अंश स्वीकृत या मान्य स्तर से ज्यादा पाए जाने का मामला एक अपवाद हो सकता है
अन्यथा इन दोनों कंपनियों के मसाला उत्पादों का निर्यात दुनिया के कई अन्य देशों को होता है और इससे पहले कहीं से कोई शिकायत नहीं मिली थी।
वर्षों पहले यूरोपीय संघ में भारतीय लालमिर्च पाउडर के बारे में कभी-कभार अलर्ट जारी किया जाता था मगर वह अब बंद हो चुका है।
एक अग्रणी भारतीय संस्था- इप्सता ने बयान जारी करके स्पष्ट कहा है कि एथीलीन ऑक्साइड (ईटीओ) कीटनाशी नहीं बल्कि एक गैस है जिससे खाद्य उत्पादों, औषधियों, फसलों एवं मसालों आदि को संरक्षित करने तथा उसमें रंग, गंध एवं स्वाद को बरकरार रखने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है।
हांगकांग एवं सिंगापुर में जिन मसाला उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई गई है वे भारत की दो अग्रणी कम्पनीयों के उत्पादन हैं जिसकी क्वालिटी हमेशा उच्च स्तर की होती है।
अंतर्राष्ट्रीय मसाला बाजार में भारत सरपट चाल से आगे बढ़ रहा है और यहां से दुनिया के 100 से ज्यादा देशों को 80 से अधिक किस्मों के मसालों एवं मसाला उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है जिसमें लालमिर्च, जीरा, हल्दी, धनिया, कालीमिर्च एवं इलायची आदि शामिल हैं।
