मजबूत वैश्विक मांग के कारण नए-नए बाजारों में पहुंच रहा है भारतीय चावल

13-Jan-2025 12:33 PM

नई दिल्ली । एशिया तथा अफ्रीका के अनेक देश भारतीय चावल के परम्परागत खरीदार बने हुए हैं जबकि इसका निर्यात बाजार विविधिकरण भी तेजी से हो रहा है जिससे अनेक नए बाजारों में भारतीय चावल पहुंचने लगा है। सरकार ने साबुत चावल के निर्यात को पूरी तरह स्वतंत्र कर दिया है।

भारत के चावल की क्वालिटी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारी सुधार आया है। सीमित समय को छोड़कर इसके निर्यात की निरंतरता भी बनी हुई है और नई-नई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

बासमती चावल की वैश्विक मांग काफी मजबूत बनी हुई है। भारत के निर्यातक चावल का शिपमेंट बढ़ाने के लिए अब अफ्रीका दक्षिण-पूर्व एशिया तथा लैटिन अमरीका के बाजारों पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं।

इसी तरह मध्य पूर्व एशिया, अमरीका तथा यूरोप में भारतीय चावल की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। 

एक विश्लेषक के मुताबिक ईरान-इजरायल विवाद सहित अन्य क्षेत्रों में उत्पन्न तनाव के कारण लोगों का नए-नए क्षेत्रों में पलायन होने से वहां चावल की मांग बढ़ रही है।

भारतीय चावल सबसे आकर्षक या प्रर्तिस्पर्धी मूल्य पर उपलब्ध रहता है इसलिए इसे आयातक देशों में ज्यादा पसंद किया जाता है। दक्षिण पूर्व एशिया में इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलेशिया तथा सिंगापुर जैसे देश पहले थाईलैंड एवं वियतनाम से चावल मंगाते थे मगर अब वहां भारतीय चावल की सक्रियता बढ़ने लगी है।

भारत के साथ एक खासियत यह है कि यहां सर्वोत्तम क्वालिटी का बासमती चावल तथा सामान्य श्रेणी का सस्ता मोटा चावल- दोनों ही पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहता है इसलिए यह दुनिया के समृद्ध तथा आर्थिक दृष्टि से कमजोर-दोनों संवर्ग के देशों की मांग एवं जरूरत को आसानी से पूरा करने में समक्ष हो जाता है। अफ्रीकी देशों में सस्ते चावल का आयात ज्यादा होता है।

भारत दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बना हुआ है। चावल के कुल वैश्विक निर्यात में अकेले भारत का योगदान 40-42 प्रतिशत रहता है

और थाईलैंड तथा वियतनाम जैसे दूसरे तथा तीसरे नम्बर के निर्यातक देश भारत से बहुत पीछे रहते हैं। भारत में चावल का उत्पादन भी अन्य निर्यातक देशों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है।