महंगे आयात के कारण उर्वरक सब्सिडी में वृद्धि की संभावना
05-May-2026 05:53 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार का मानना है कि विभिन्न कारणों से रासायनिक उर्वरकों का आयात महंगा बैठ रहा है और घरेलू उद्योग का उत्पादन खर्च भी बढ़ गया है। इसके फलस्वरूप उर्वकरों पर दी जाने वाली सब्सिडी में स्वाभाविक रूप से वृद्धि हो जाएगी।
पश्चिम एशिया में कुछ दिनों की शांति के बाद ईरान और अमरीका के बीच तनाव पुनः चरम पर पहुंच गया है और कभी भी युद्ध दोबारा शुरू होने की आशंका बढ़ गई है। वैश्विक बाजार में उर्वरकों का भाव ऊंचा हो गया है और शिपमेंट खर्च भी बढ़ गया है। उर्वरक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ऊंचे दाम के बावजूद उर्वरकों का विशाल आयात जारी रखना आवश्यक है क्योंकि घरेलू उत्पादन इसकी मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता है।
वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सरकार ने इस वर्ष खरीफ सीजन की जरूरत को पूरा करने के लिए वैश्विक बाजार में प्रचलित ऊंचे मूल्य पर 64 लाख टन यूरिया एवं 19 लाख टन नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटेशियम (एन पी के) उर्वरक का आयात करने का प्लान बनाया है। उर्वरक आयात के लिए वैश्विक टेंडर जारी किए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय आम बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उर्वरक सब्सिडी की राशि 1.71 ट्रिलियन रुपए आंकी गई है। यह फरवरी का अनुमान है जबकि अब आयात खर्च में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हो रही है। खरीफ फसलों की बिजाई अगले महीने से औपचारिक तौर पर आरंभ हो जाएगी और मई के अंत तक सभी राज्यों को उर्वरक का समुचित स्टॉक उपलब्ध करवाना जरुरी होगा।
