मंडियों में आवक कम होने से तिलहनों के दाम में सुधार
13-Jan-2025 11:47 AM
नई दिल्ली । प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में माल की आवक कम होने तथा मिलर्स-प्रोसेसर्स की मांग निकलने से सोयाबीन, मूंगफली एवं सरसों जैसे तिलहनों के दाम में कुछ सुधार दर्ज किया गया।
वैसे सोयाबीन का थोक मंडी भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे रहा और मूंगफली तथा सूरजमुखी का कारोबार भी समर्थन मूल्य से कम दाम पर हुआ। सप्ताह के अंतिम दिन यानी 11 जनवरी को मंडियों में केवल 1.35 लाख बोरी सरसों की आवक हुई।
उल्लेखनीय है कि नैफेड तथा हैफेड जैसी सरकारी एजेंसियों के साथ अभी सरसों का अच्छा खासा स्टॉक मौजूद है मगर इसकी बिकवाली में जल्दबाजी नहीं दिखाई जा रही है। इससे मंडियों में काफी हद तक संतुलन बना हुआ है।
नैफेड द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सोयाबीन तथा मूंगफली की खरीद भी की जा रही है जिसे आगामी महीनों के दौरान पुनः बाजार में बिक्री के लिए उतारा जा सकता है।
इसी तरह भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के पास बिनौला (कॉटन सीड) का स्टॉक बढ़ रहा है। कपास की पैदावार कम होने के बावजूद निगम को इसकी भारी खरीद करनी पड़ रही है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार सीसीआई द्वारा हाल ही में सस्ते दाम पर बिनौला की बिक्री किए जाने से अन्य तिलहन फसलों- सोयाबीन, मूंगफली एवं सूरजमुखी की मांग एवं कीमत प्रभावित हुई है।
इससे कारोबारी धारणा में विकृति पैदा हो सकती है। पिछले सप्ताह मंडियों में सरसों का औसत मूल्य 6100/6200 रुपए प्रति क्विंटल, मूंगफली का 5500/5600 रुपए प्रति क्विंटल, तथा सोयाबीन 4200/4300 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।
खाद्य तेलों के दाम में भी कुछ सुधार आया लेकिन कमजोर निर्यात मांग के कारण मूंगफली तेल का भाव लगभग स्थिर रहा।
