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28-Oct-2026 06:00 PM
नई दिल्ली। मौसम एवं मानसून की हालत अनुकूल नहीं रहने से खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है जिससे त्यौहारी सीजन के बाद भी कृषि एवं खाद्य उत्पादों का भाव ऊंचा और मजबूत रह सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में विभिन्न उत्पादों का भाव तेज होने लगा है जबकि ईरान-अमरीका युद्ध के कारण क्रूड खनिज तेल का दाम बढ़ने से सामुद्रिक परिवहन खर्च में वृद्धि हो रही है। इससे भारत में आयात महंगा हो सकता है। इसके अलावा अमरीकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की विनिमय दर भी 'डील ड्रम' की स्थिति में है।
भारत में आमतौर पर चावल एवं गेहूं का आयात नहीं होता है लेकिन खाद्य तेल एवं दलहनों का रिकॉर्ड आयात किया जाता है। अब रूई का आयात भी नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है।
लम्बे समय के बाद इस वर्ष 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गई है। दलहन-तिलहन, गन्ना एवं कपास की पैदावार इस बार घटने की संभावना है। इसलिए इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों का भाव ऊंचा रह सकता है।