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29-Sep-2026 10:58 AM
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की कम एवं अनियमित वर्षा होने तथा बारिश का वितरण भी असमान रहने से इस वर्ष खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है और साथ ही साथ आगामी रबी फसलों पर भी खासकर वर्षा आश्रित क्षेत्रों में खतरा बढ़ने की आशंका है। अल नीनो मौसम चक्र की सक्रियता फरवरी-मार्च 2027 तक बरकरार रहने का अनुमान है जिससे आगामी महीनों के दौरान बारिश में कमी आ सकती है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान एक तरफ देश के कई भागों में बारिश का काफी अभाव रहा जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में अत्यन्त मूसलाधार वर्षा हुई और कहीं-कहीं भयंकर बाढ़ आ गई। मौसम का यह दोनों रूप खरीफ फसलों के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है।
यद्यपि कुल मिलाकर खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में ज्यादा गिरावट नहीं आई है और यदि धान को छोड़ दिया जाए तो अन्य संवर्गों का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के आसपास ही रहा है लेकिन मौसम एवं मानसून की प्रतिकूल स्थिति से फसलों को काफी नुकसान होने की आशंका है। औसत उपज दर प्रभावित हो सकती है।
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने आश्वस्त किया है कि कुल मिलाकर खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र का लक्ष्य हासिल हो गया है। 2025-26 के खरीफ सीजन के दौरान देश में 1247.60 लाख टन चावल सहित कुल 1760.40 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था जिसमें दलहनों एवं मोटे अनाजों की पैदावार भी शामिल थी। लेकिन इस बार अल नीनो के कारण कुछ चिंता बनी हुई है।