कमजोर मांग एवं भरपूर आपूर्ति के कारण चावल के वैश्विक बाजार मूल्य में गिरावट

09-Jan-2025 02:11 PM

हैदराबाद । पिछले तीन सप्ताहों के दौरान चावल के वैश्विक बाजार मूल्य में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है क्योंकि एक तो आयातक देशों में मांग सुस्त पड़ गई और दूसरे, अन्तर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में भारत की धमाकेदार सक्रियता से चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ गई।

एक अग्रणी व्यापार विश्लेषक के अनुसार चालू सीजन के दौरान चावल का उत्पादन बेहतर होने से कीमतों में नरमी आ रही है।

चेन्नई से सोना मसूरी चावल का भाव घटकर वर्तमान समय में करीब 4200 रुपए प्रति क्विंटल रह गया है जो पहले 6200 रुपए प्रति क्विंटल के उच्च स्तर पर चल रहा था।

यूरोपीय संघ में 5200/5400 रुपए प्रति क्विंटल के मूल्य स्तर पर सोना मसूरी चावल की अच्छी मांग चल रही थी इसलिए भारतीय निर्यातकों को इसका शिपमेंट करने में कोई कठिनाई नहीं होगी।

ध्यान देने की बात है कि नीचे दाम वाले सोना मसूरी एवं अन्य चावल का निर्यात सिंगापुर तथा वियतनाम जैसे देशों को किया जाता है जबकि अमरीका एवं यूरोपीय संघ के बाजार में अच्छी क्वालिटी एवं ऊंची कीमत वाले चावल की ज्यादा  मांग रहती है।

श्रीलंका से निर्यात ऑर्डर मिलना लगभग बंद हो गया है। वहां सरकार ने चावल के दाम की उच्चतम सीमा निर्धारित कर रखी है जिससे भारत से आयात को अब प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है और इसलिए श्रीलंकाई आयातकों की पूछ परख ज्यादा नहीं देखी जा रही है।

जहां तक मलेशिया का सवाल है तो उसके आयातक मोल भाव ज्यादा कर रहे हैं। आयातक 490 डॉलर प्रति टन की दर से सोना मसूरी चावल का अनुबंध करना चाहते हैं जिसमें परिवहन खर्च और बीमा व्यय भी शामिल है।

दूसरी ओर भारतीय निर्यातक 580 डॉलर प्रति टन की दर से अपना चावल बेचना चाहते हैं। शिपमेंट चार्ज में इजाफा होने के कारण भारतीय निर्यातक मलेशियाई ऑफर को स्वीकार करने के इच्छुक नहीं है। 

राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि थाईलैंड एवं वियतनाम की तुलना में भारतीय चावल के निर्यात ऑफर मूल्य में ज्यादा गिरावट नहीं आई है।

केवल डॉलर के मजबूत होने से भारतीय चावल का निर्यात मूल्य आकर्षक हुआ है और निर्यातकों का मार्जिन बढ़ा है। वैसे भारतीय चावल की मांग कुछ कमजोर देखी जा रही है।